After defeat, they surrounded the BJP headquarters ... to call the police

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने दौसा नगर परिषद के चेयरमैन राजकुमार जायसवाल के खिलाफ गत तीन जनवरी को लिए अविश्वास प्रस्ताव को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने चेयरमैन व वाइस चेयरमैन अविश्वास प्रस्ताव नियम 2017 के नियम 2 के तहत उस प्रावधान को अवैध माना है, जिसमें योग्य सदस्य की परिभाषा में निर्वाचित सदस्यों को ही मतदान करने का योग्य माना था। न्यायाधीश मनीष भंडारी और न्यायाधीश डीसी सोमानी की खंडपीठ ने यह आदेश राजकुमार जायसवाल की याचिका पर दिया।

हालांकि, अदालत ने राज्य सरकार को इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए समय देते हुए इस आदेश की क्रियान्विति को 15 दिन के लिए स्थगित कर दिया। वहीं अदालत ने निर्वाचित हुए चेयरमैन मुरली मनोहर शर्मा के मामले में पक्षकार बनने के प्रार्थना पत्र को भी खारिज कर दिया।
अधिवक्ता आरबी माथुर ने बताया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ पास किए गए अविश्वास प्रस्ताव और चेयरमैन व वाइस चेयरमैन अविश्वास प्रस्ताव नियम 2017 के नियम 2 को चुनौती दी गई। याचिका में कहा कि नए नियमों के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव में केवल नगर परिषद के निर्वाचित सदस्यों को ही शामिल किया गया है।

नियमानुसार एमएलए व एमपी को एक्स आॅफिशियो मैंबर्स मानते हुए मताधिकार दिया गया है, जबकि इस अविश्वास प्रस्ताव पर एमएलए व एमपी की गैर मौजूदगी में मतदान हुआ है। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 243 आर व नगर पालिका अधिनियम का उल्लंघन है। सुनवाई के दौरान मौजूदा चेयरमैन मुरली मनोहर शर्मा ने मामले में पक्षकार बनने का प्रार्थना पत्र दायर करते हुए कहा कि वे इस मामले में प्रभावित पक्षकार हैं। इसलिए उन्हें मामले में पक्षकार बनाया जाए, लेकिन अदालत ने उनके पक्षकार बनाने संबंधी प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया।

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