जयपुर। देश में कानून बनने के बाद भी दुकानदार और सिगरेट-बीडी कंपनियां अपने फायदे के लिए खुले तौर पर अपने उत्पाद बेच रहे हैं। लीगल मेट्रोलोजी अधिनियम में संशोधन के बाद खुली सिगरेट और बीड़ी की बिक्री पर रोक लगी हुई है। देश भर में 1 जनवरी 2016 से लीगल मेट्रोलोजी अधिनियम के तहत सिगरेट व बीड़ी की खुली बिक्री को प्रतिबंधित करना था, लेकिन आज भी राजस्थान समेत दूसरे राज्यों में इनकी बिक्री खुले में हो रही है। इस पर किसी तरह का प्रतिबंध नही है। मई 2015 में अधिसूचित लीगल मेट्रोलोजी एक्ट की पालना सभी राज्यों को करनी थी। इस एक्ट के तहत नए अनिवार्य डिस्प्ले (85 फीसदी सचित्र चेतावनी) के बगैर कोई भी तंबाकू उत्पाद बेचा नहीं जा सकता है। इसका उल्लंघन करने पर चिकित्सा विभाग ने 18 अप्रेल को जयपुर में दो सिगरेट कंपनियों के गोदाम पर छापा मारा और करीब 37 करोड़ रुपए की सिगरेट जब्त की है, जिसमें 85 फीसदी सचित्र चेतावनी नहीं थी।
तंबाकू एकमात्र कानूनी उपभोक्ता उत्पाद है , जो सेवन करने वाले हर एक को नुकसान पहुंचाता है और जो उसका उपभोग करते हैं उसमें से एक तिहाई तक की मौत हो जाती है। तम्बाकू सेवन सबसे बड़ी मानव निर्मित त्रासदी है। इससे हर साल देश में 12 लाख लोगों की मौत होती है। इस आंकड़े में से करीब 72 हजार मौतें राजस्थान से है। बीड़ी से 5 लाख 80 हजार, सिगरेट से 3.5 लाख और इतने ही धूम्र रहित तंबाकू उत्पादों का सेवन करने दम तोड़ रहे हैं। किशोर व युवा वर्ग इसकी जद में ज्यादा आ रहा है। तंबाकू उद्योगों की भी किशोर व युवा वर्ग पर नजर ज्यादा रहती है। खुले तौर पर सिगरेट और बीड़ी बेचना तंबाकू उद्योग बिक्री बढ़ाने की एक स्थापित रणनीति है। वैश्विक युवक तंबाकू सर्वेक्षण के मुताबिक भारत में 13 से 15 साल के आयुवर्ग के बच्चे 15 फीसदी किशोर तंबाकू का सेवन करते हैं। तकरीबन दो तिहाई सिगरेट और बीड़ी की बिक्री पैकेट या बंडल के अनुसार नहीं खुली होती है। खुली बिक्री खास कर बच्चों के बीच तंबाकू उत्पादों की बिक्री बढ़ाती है और तंबाकू उत्पाद की खरीदारी की तरफ उनका झुकाव बढ़ाती है। यह टैक्स बढ़ा कर तंबाकू की मांग कम करने के सरकार के उपायों को भी नाकाम करती है। उपभोक्ता जब पूरे पैकेट की जगह थोड़ा सा या खुला तंबाकू उत्पाद खरीदता है तो वह टैक्स के कारण उसके दाम में बढ़ोत्तरी को महसूस नहीं कर पाता। खुली सिगरेट पर चित्रात्मक चेतावनी नहीं होने से ग्राहक को तंबाकू के हानिकारक प्रभावों के बारे में जानकारी नहीं मिल पाती। हालांकि काटपा की धारा 7/8 का उल्लंघन करने के चलते सिगरेट- बीड़ी की खुली बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए था, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है।
शोधकर्ता डा. प्रकाश सी. गुप्ता कहते हैं कि खुली सिगरेट व बीड़ी की बिक्री तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाकर कम नहीं की जा सकती है। उन्होने मुंबई का जिक्र करते हुए बताया कि महाराष्ट्र के मेट्रोलोजी अधिकारी अमिताभ गुप्ता ने समस्त सिगरेट और बीड़ी निर्माताओं को पत्र भेज कर उनसे मई 2015 में अधिसूचित लीगल मेट्रोलोजी एक्ट का अनुपालन करने को कहा है। इस संशोधित अधिनियम के तहत अधिनियम में नियत अनिवार्य डिस्प्ले के बगैर कोई तंबाकू उत्पाद बेचा नहीं जा सकता है। इस संशोधन का प्रत्यक्ष नतीजा यह है कि अब खुली सिगरेट और बीड़ी नहीं बेची जा सकती।
टाटा मेमेारियल अस्पताल के प्रोफेसर एवं कैंसर सर्जन डा.पंकज चतुर्वेदी कहते हैं कि बच्चों और युवकों में तंबाकू के सेवन और इस बीमारी पर नियंत्रण के लिए इसके इस्तेमाल और इसको प्रोत्साहन देने वाली किसी भी गतिविधि पर अकुंश लगाने की तत्काल जरुरत है। पूरे विश्व में तंबाकू के सेवन को कम करने के लिए दक्ष प्रणाली बनाया है। देश में बच्चों और युवकों में तंबाकू सेवन करने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है। इस अधिनियम के प्रभावी निंयत्रण से खुली तौर पर बीड़ी सिगरेट पीने वालों की संख्या में कमी आएगी, वहीं इसका प्रोत्साहन कम होगा और तंबाकू जनित बीमारियों को काबू पाया जा सकेगा। .

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