Is 2019 worried about Modi? So it seems ...

जयपुर। अभी हाल ही कुछ दिन पहले एक टीवी चैनल का सर्वे आया था जिसमें कहा गया है कि अगर आज चुनाव हो जाए तो एनडीए को 309 और यूपीए को 102 सीटें मिल सकती है। यानि इस सर्वे का सीधा-सीधा मतलब है 2019 में भी मोदी ही प्रधानमंत्री बनेंगे। मगर अस सर्वे पर सवाल उठाना इसलिए लाजिमी है कि 2014 में जब एनडीए 336 सीटें मिली थी उसमें से भाजपा को राजस्थान से 25, उत्तर प्रदेश से 71, मध्य प्रदेश से 27 और कर्नाटक से 27, गुजरात से 26 और बिहार से 22 सीटें मिली थी यह कुल 198 सीटें होती है और वर्तमान स्थिति को देखते हुए लगता नहीं की यह प्रदर्शन भाजपा दोहरा सकती है क्योंकि इन राज्यों में सरकार के खिलाफ माहौल बना हुआ है। इसका नतीजा राजस्थान में हुए उपचुनावों में सामने भी आ चुका है जहां दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा को बूरी तरह हार का मुंह देखना पड़ा है। वहीं पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी के गृहराज्य गुजरात में भाजपा को विधानसभा चुनाव जीतने में जो जोर लगाना पड़ा और बड़ी मुश्किल से सरकार को बचा पाई उससे लगता है नहीं है इस सर्वे की बातें सार्थक होगी। प्रधानमंत्री को भी शायद इस बात का अभास है इसलिए उन्होंने सारे देश में एकसाथ चुनाव कराने की वकालत की है और अपने पार्टी कार्यकर्ताओं, सांसदों को तैयार रहने को कहा गया है।

बजट में भी इसकी छाया देखने को मिली है जिस तरह से बजट में गांव और किसानों पर फोकस किया गया है लगता है भाजपा जल्द ही चुनाव कराने के मुड़ में है नहीं तो एक साल पहले इस सर्वे का क्या औचित्य है भाजपा कहीं इन सर्वे के जरिए हवा बनाने की कोशिश तो नहीं कर रही है। क्योंकि आने वाले एक साल में लगभग 10 राज्यों में विधानसभा होने हैं और प्रधानमंत्री एकदम से ऐसा फैसला लेकर सभी विपक्षी पार्टियों को चौंका भी सकते हैं जिससे उनके खिलाफ माहौल बनाने के लिए विपक्ष को कोई मौका ना मिले। भाजपा चाहे जो भी कहे। मगर उनकी प्रमुख विपक्ष पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी की लोकप्रियता भी लगातार बढ़ती जा रही है। इसका भी आभास पीएम मोदी को है अक्सर देखने में भी आता है कि राहुल गांधी का एक बयान आते ही भाजपा का पूरा कूनबा उनके पीछे लग जाता है जिससे लगता है कि भाजपा खुद ही राहुल गांधी को लोकप्रिय करने और उनका कद बढ़ाने को आतूर है। जिस तरह से राहुल गांधी ने गुजरात में मोदी को पसीने-पसीने कर दिया था उससे भाजपाई खुल कर नहीं बोल रहे हैं मगर मन ही मन उन्हें राहुल की बढ़ती लोकप्रियता का डर तो लग ही रहा है। इसलिए आने वाले लोकसभा चुनावों में भाजपा को 300 से ऊपर सीटें मीलना कोरी हवाबाजी है। यह सिर्फ मार्केटिंग है जिस तरह कंपनियां अपना प्रोडक्ट बेचने से पहले मार्केटिंग करती है ठीक उसी तरह यह सर्वे है। अगर ऐसा होता तो गुजरात में भाजपा को चुनाव जीतने में जोर नहीं आता जो प्रधानमंत्री का गृहराज्य हैं जहां 2014 में दूसरे राज्यों में मोदी लहर के नाम से ही सरकारें बन गई वहीं गुजरात में खुद मोदी को रैलियां करनी बड़ी जी-तोड़ मेहनत करनी पड़ी। और अभी हाल ही में राजस्थान में हुए उपचुनाव भी इस सर्वे की शुरुआती पोल खुलती नजर आ ही गई।

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