
जयपुर। राजस्थान में गांव-ढाणी तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में आयुष्मान आरोग्य मंदिर एक बड़े बदलाव के रूप में उभरकर सामने आए हैं। पहले जहां सामान्य बीमारी के उपचार के लिए भी लोगों को कई किलोमीटर दूर अस्पतालों का रुख करना पड़ता था, वहीं अब गांव और मोहल्ले के निकट ही बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। गर्भवती की देखभाल से लेकर बच्चों के स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग, मानसिक स्वास्थ्य, बुजुर्गों की देखभाल, टेलीमेडिसिन तथा आवश्यक जांच एवं दवाओं तक व्यापक स्वास्थ्य सुविधाएं घर के नजदीक ही उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति-2017 के अनुरूप देशभर में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में प्रदेश में गांव-ढाणी तक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदल रही है। राजस्थान में 18 हजार 436 स्वास्थ्य संस्थानों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिनमें से अब तक करीब 11 हजार 500 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को पूरी तरह क्रियाशील किया जा चुका है, शेष संस्थानों को चरणबद्ध रूप से शुरू किया जा रहा है। राज्य में वर्तमान में 8,370 उप स्वास्थ्य केंद्र, 2 हजार 107 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 286 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं 728 शहरी जनता क्लिनिक को आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में विकसित कर लोगों को नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में प्रशिक्षित कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ), एएनएम, स्टाफ नर्स और आशा कार्यकर्ता की टीम सातों दिन लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही है। इसका सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को मिल रहा है, जिन्हें अब छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए जिला अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में केवल सामान्य उपचार ही नहीं बल्कि कॉम्प्रेहेंसिव प्राइमरी हेल्थ केयर के तहत 12 प्रकार की विस्तृत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें गर्भवती महिलाओं एवं प्रसव संबंधी सेवाएं, नवजात एवं शिशु स्वास्थ्य, किशोर स्वास्थ्य, परिवार नियोजन एवं प्रजनन स्वास्थ्य, संक्रामक रोगों का उपचार, सामान्य ओपीडी सेवाएं, मधुमेह, उच्च रक्तचाप सहित गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग एवं प्रबंधन, आंख-कान-नाक एवं गला संबंधी सेवाएं, मुख स्वास्थ्य सेवाएं, जीरियाट्रिक एवं पेलिएटिव केयर, आपातकालीन प्राथमिक उपचार, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी स्क्रीनिंग एवं उपचार जैसी सुविधाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से टेलीमेडिसिन सेवाओं को नया विस्तार मिला है। ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए वरदान साबित हो रही है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल तथा मेडिकल कॉलेजों से डिजिटल माध्यम से जोड़ा गया है। इस व्यवस्था के माध्यम से मरीजों को अपने गांव के स्वास्थ्य केंद्र पर ही विशेषज्ञ चिकित्सकों से ऑनलाइन परामर्श मिल रहा है। इससे अनावश्यक यात्रा, समय और खर्च में उल्लेखनीय कमी आई है। अब तक राज्य में 31 लाख से अधिक लोग टेलीमेडिसिन सेवाओं का लाभ उठा चुके हैं।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर केवल उपचार तक सीमित नहीं हैं, हाॅलिस्टिक एप्रोच के साथ लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं। राज्यभर में अब तक इन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में 44.49 लाख से अधिक वेलनेस सत्रों का आयोजन किया जा चुका है। इन कार्यक्रमों से लगभग 4 करोड़ नागरिक लाभान्वित हुए हैं। इन वेलनेस सत्रों, स्वास्थ्य मेलों और विशेष स्वास्थ्य दिवसों के माध्यम से लोगों को योग, पोषण, गैर-संचारी रोगों की रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया जा रहा है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर लोगों को 121 प्रकार की आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना के ई-औषधि सॉफ्टवेयर के माध्यम से दवाओं की ऑनलाइन उपलब्धता और आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इसी प्रकार इन केंद्रों पर 14 प्रकार की आवश्यक जांच सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, जिनमें हीमोग्लोबिन, गर्भावस्था जांच, ब्लड शुगर, मलेरिया, डेंगू, एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, सिफिलिस, मूत्र जांच, पानी एवं नमक की गुणवत्ता जांच, सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग सहित अन्य आवश्यक जांच शामिल हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को अस्पताल-केंद्रित व्यवस्था से निकालकर समुदाय आधारित व्यवस्था में बदला है। अब लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती, विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो रही है, आवश्यक दवाइयां और जांचें निःशुल्क मिल रही हैं तथा बीमारियों की समय रहते पहचान और उपचार संभव हो रहा है। राजस्थान में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का तेजी से विस्तार इस बात का सुखद संकेत है कि स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र अब बड़े अस्पतालों से निकलकर आमजन के घरों के निकट पहुंच चुका है। गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं का यह मॉडल राज्य में जनस्वास्थ्य के नए मानक स्थापित कर रहा है।