RTE Punishment for private schools who do not adhere to the act will be punished

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने निशुल्क शिक्षा एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 (आरटीई एक्ट) के तहत प्रदेश के गैर सरकारी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटों पर दुर्बल वर्ग एवं असुविधाग्रस्त समूह के निशुल्क प्रवेश के लिए अभिभावकों की वार्षिक आय सीमा एक लाख रूपए के स्थान पर ढाई लाख रूपए करने को मंजूरी दी है।

श्री गहलोत की इस स्वीकृति से प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम की भावना को मजबूती मिलेगी। आय सीमा बढ़ाने से दुर्बल वर्ग और असुविधाग्रस्त समूह के और अधिक बच्चे गैर सरकारी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश पा सकेंगे। मुख्यमंत्री के इस निर्णय से बड़ी संख्या में इस वर्ग के वे बच्चे भी बड़े एवं नामी निजी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे जो गत सरकार द्वारा अभिभावकों की आय सीमा ढ़ाई लाख रूपए सालाना से घटाकर एक लाख रूपए करने के कारण वंचित हो गए थे।

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों शिक्षा विभाग की वीडियो कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री ने इस बात पर बल दिया था कि निशुल्क शिक्षा एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम की भावना के अनुरूप जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को लाभ दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की थी कि अभिभावकों की आय सीमा घटाने के फैसले के कारण जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को गैर सरकारी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा ग्रहण करने का अवसर नहीं मिल पा रहा है, जो कि इस अधिनियम की मूल भावना के विपरीत है।

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