नई दिल्ली। दूरसंचार कंपनिया किस कदर अपने उपभोक्ताओं से कॉल ड्राप होने का पैसा वसूलती है और उसे पता भी नहीं चल पाता है। काफी दिनों से कॉलड्राप जैसी गंभीर समस्या पर चर्चा चल रही थी। जिस पर आज ट्राई ने नई गाईडलाईन जारी कर उपभोक्ताओं को राहत और टेलिकॉम कंपनियों को नसीहत दी है। दूरसंचार सेवाएं देने वाली कंपनियों को अब कॉल ड्रॉप पर 10 लाख रुपये तक की पेनाल्टी अदा करनी पड़ सकती है। मौजूदा नियमों के मुताबिक कॉल ड्रॉप पर दूरसंचार कंपनियों से अधिकतम 50 हजार रुपये की पेनाल्टी वसूली जाती है।दूरसंचार नियामक संस्था ट्राई द्वारा कॉल ड्रॉप समस्या को दूर करने के लिए शुक्रवार को जारी सख्त दिशानिदेर्शों के अनुसार लगातार तीन तिमाही तक बेंचमार्क का उल्लंघन करने पर अधिकतम पेनाल्टी वसूली जाएगी। इस बेंचमार्क के तहत सामान्य समय में 2 फीसदी से ज्यादा और विशेष परिस्थितियों में या व्यस्त समय में 3 फीसदी से ज्यादा कॉल ड्रॉप होने पर ही पेनाल्टी का नियम लागू होगा। नए दिशानिदेर्शों के बारे में जानकारी देते हुए ट्राई के चेयरमैन आर एस शर्मा ने संवाददाताओं को बताया कि न्यूनतम पेनाल्टी 1-5 लाख रुपये के बीच होगी।

यह श्रेणीबद्ध पेनाल्टी है जो नेटवर्क की कार्यकुशलता पर निर्भर करेगी। ट्राई के कार्यकारी सचिव एस के गुप्ता के अनुसार अगर दूरसंचार आॅपरेटर लगातार तिमाही में कॉल ड्रॉप बेंचमार्क का उल्लंघन करता है तो पेनाल्टी डेढ़ गुना बढ़ जाएगी और लगातार तीसरे महीने में भी यह उल्लंघन जारी रहता है तो पेनाल्टी दोगुनी हो जाएगी, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये होगी।इससे पहले क्वालिटी आॅफ सर्विस रूल्स के तहत कॉल ड्रॉप बेंचमार्क के हर उल्लंघन पर 50 हजार रुपये की पेनाल्टी लगती थी। इसमें संशोधन के साथ ही ट्राई ने कॉल ड्रॉप को मापने के लिए टेलीकॉम सर्किल के बजाय मोबाइल टावर को आधार बनाया है। नए नियमों के अनुसार पेनाल्टी तय करते समय नेटवर्क को प्रभावित करने वाले तात्कालिक कारणों और नेटवर्क के भौगोलिक विस्तार को भी ध्यान में रखा जाएगा।

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