देष में हर साल 11.57 लाख कैंसर के रोगी आ रहे हैं सामने, राजस्थान में लगातार बढ रही हैं मुंह, फेफडें और स्तन कैंसर रोगियों की संख्या.
जयपुर। पुरूष जननांग में हुए कैंसर (सीए पेनिस) रोगी के लिंग पुनःनिर्माण सर्जरी में राजधानी के चिकित्सकों ने अनोखी सफलता हासिल की है। भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के चिकित्सकों की टीम ने 64 वर्षिय राजेष कुमार (परिवर्तित नाम) की एक ही सर्जरी में कैंसर की गांठ निकालकर यूरीनरी फंक्षन के साथ लिंग पुनःनिर्माण किया है। संभाग के इस पहले केस को चिकित्सालय के प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन डॉ उमेष बंसल की टीम ने ऑपरेट कर सफलता हासिल की है।
डॉ बंसल ने बताया कि जोधपुर निवासी इस रोगी के लिंग में कैंसर की गांठ थी, गांठ के लिंग में फैले हुए होने के कारण लिंग को बचाना संभव नहीं था, जिसके चलते लिंग निकालने के साथ ही लिंग पुनःनिर्माण की सर्जरी की योजना बनाई गई। इसमें रोगी की जांघ से त्वचा और रक्त वाहिनियों को लेकर रोगी के लिंग का पुनःनिर्माण किया गया। छह घंटे चली इस सर्जरी में रोगी का लिंग यूरीनरी फंक्षन के साथ पूर्ण रूप से बनाया गया। इस सर्जरी में डॉ बंसल के साथ ही कैंसर सर्जन डॉ प्रषांत शर्मा, प्लास्टिक सर्जन डॉ सौरभ रावत, एनिस्थिसियोलॉजिस्ट डॉ पुष्पलता गुप्ता की टीम शामिल थी।

-इंडियन मेडिकल जनरल में नहीं है ऐसा एक भी केस रिपोर्ट
डॉ बंसल ने बताया कि इंडियन मेडिकल जनरल में कैंसर के रोगी में तत्काल पूर्ण लिंग पुनःनिर्माण (इमिडिएट कम्पलिट पीनाइल रिकंस्ट्रेक्षन) का कोई भी केस दर्ज नहीं है। आमतौर पर पुरूषों में लिंग पुनःनिर्माण सर्जरी अलग-अलग चरणों में की जाती है। जिसमें सबसे ज्यादा चुनौतिपूर्ण पेषाब की नली बनाना होता है। कैंसर रोगी में सर्जरी के बाद किमोथैरेपी और रेडिएषन थैरेपी की जरूरत होती है। जिसकी शुरूआत सर्जरी के छह सप्ताह के भीतर की जाती है। इस वजह से इस रोगी में एक ही सर्जरी के दौरान बगैर किसी जटिलता के पूर्ण लिंग निर्माण करना आवष्यक था, जिसमें चुनौतियों के बावजूद सफलता हासिल की गई। डॉ सौरभ ने बताया कि इस तकनीक के जरिए सर्जरी करने पर रोगी को मानसिक तनाव से दूर रखने के साथ ही उसकी ओर समय और पैसों की बचत भी की गई।

-तेजी से बढ रही है कैंसर रोगियों की संख्या
रेडिएषन ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ निधि पाटनी ने बताया कि कैंसर रोगियों की संख्या में तेजी से बढोतरी होती जा रही है। देष में हर साल 11ण्57 नए कैंसर के रोगी सामने आ रहे और 7ण्84 लाख कैंसर रोगियों की मौत हो रही है। राजस्थान में कैंसर रोगियों की संख्या तेजी से बढ रही है। जिसमें पुरूषों में मुंह और फैफडें का कैंसर और महिलाओं में स्तन कैंसर की संख्या सबसे ज्यादा है।
सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ प्रषांत शर्मा ने बताया कि शरीर में आने वाले परिवर्तनों को नजर अंदाज करें बगैर उन्हें तुरंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए। खान-पान या शौच की आदतों में बदलाव, आवाज में परिवर्तन, मुंह में छाला, ना भरने वाला घाव, शरीर के किसी भी अंग में गांठ का महसुस होना आदि कैंसर के प्रारंभिक लक्षण है। जिनकी जांच और चिकित्सीय परामर्ष जरूरी है। आमजन में इन लक्षणों को लेकर जानकारी के अभाव के कारण कैंसर रोगियों में रोग की पहचान देरी से होती है।

डॉक्टर्स ने बताया कि कैंसर की रोकथाम में कैंसर रजिस्ट्री अहम भूमिका निभाती है। रजिस्ट्री के माध्यम से उस क्षेत्र में कैंसर रोगियों की संख्या, रोग के प्रकार, उपचार के असर आदी मुख्य जानकारियां शामिल होती है। राजस्थान सहित देष के अधिकांष राज्यों में कैंसर रजिस्ट्री ना होने के कारण कैंसर की रोकथाम के लिए प्रभावी योजनाएं नहीं बन पा रही है।

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