जयपुर। जाली नोटों की तस्करी के मामले में सही तफ्तीश नहीं करने और अधूरे अनुसंधान करने वाले अनुसंधान अधिकारी एसआई तेजराज सिंह के खिलाफ विशेष अदालत (जाली नोट प्रकरण) ने कड़ा रुख अपनाते हुए नोटिस थमाया है, जिसमें कहा है कि लोक सेवक के पद पर रहते हुए अपने कर्तव्य के विमुख जाकर कार्य करने के लिए क्यों नहीं दण्डि़त किया जाए। न्यायाधीश गणेश कुमार ने आईजी जयपुर को आदेश की प्रति और नोटिस भेजते हुए आदेश दिए कि वह दोषी अनुसंधान अधिकारी तेजराज सिंह के खिलाफ सामान्य नियम दण्डिक 66 के तहत कार्रवाई करके कोर्ट को अवगत कराए। कोर्ट ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कराने वाले परिवादी मनभावन गुर्जर निवासी गांव धोली गुमटी को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है कि मिथ्या साक्ष्य गढ़ने के लिए क्यों नहीं उसके खिलाफ अभियोजन कार्रवाई की जाए। मामले में मौके से फरार हुए आरोपी रफीक एवं नकली नोट देने वाले कंचा उर्फ अनवर के खिलाफ आज तक पुलिस की जांच लंबित है। साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने आरोपी शाकिर मेव को बरी करते हुए परिवादी व अनुसंधान अधिकारी के खिलाफ यह कार्रवाई की गई। विज्ञान नगर, कोटा निवासी एसआई तेजराज सिंह अब रिटायर्ड हो चुके हैं। मनभावन गुर्जर ने बांदीकुई थाने में 29 जनवरी, 2012 को मुकदमा दर्ज कराया था कि उसकी दुकान पर सिगरेट का पैकेट लेने पर आरोपी शाकिर 500 रुपए का नकली नोट दिया था और पड़ौसी भगवान सहाय सैनी के सहयोग से उसे पकडक़र पुलिस के हवाले किया था। पुलिस ने शाकिर के पास 23 नोट और घर पर दस नोट बरामद किए थे। हालांकि कोर्ट में जिरह के दौरान नकली नोट पहचानने वाले एसबीबीजे बैंक के कैशियर देवीसिंह मीणा, भगवान सहाय, परिवादी मनभावन सहित अन्य गवाह कोर्ट में अपने पूर्ववर्ती बयानों से मुकर गए। एसआई तेजराज ने नकली नोट बरामदगी का नक्शा भी नहीं बनाया। 26 नोट जब्त किए थे, लेकिन पैकेट में मिले 27 नोट। तेजराज सिंह ने नोटों को एक जैसा पदार्थ मानते हुए लिफाफों में से एक-एक नोट निकाल कर जांच के लिए भेजा। कोर्ट ने आदेश में कहा कि आरबीआई का प्रत्येक नोट एक ईकाई होता है। सभी पर अंक होते हैं। सभी नोटों की जांच जरुरी थी। एफआईआर में नोट का वर्णन ही नहीं लिखा। कॉल डिटेल रिपोर्ट प्रमाणित नहीं। नोटों की कस्टडी भी सही नहीं रखी गई थी।

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