सीकर/बाड़मेर. संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन के दौरान अफ्रीका के कांगो (डीआर) में प्रदर्शनकारियों के हमले में शहीद हुए राजस्थान के दो बीएसएफ जवानों की पार्थिव देह तिरंगा यात्रा के साथ उनके पैतृक गांव पहुंची। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए दोनों के गांवों में हजारों लोग जुटे और दोनों गांव देशभक्ति नारों से गूंजते रहे। वहीं, शहीद शिशुपाल को देखकर पूरा परिवार भावुक हो गया। पत्नि कमला देवी अपने पति को देखकर वंदे मातरम के नारे लगाने लगीं। फिर भावुक हो गईं। उन्होंने पति के करीब जाकर उन्हें सैल्यूट किया। बाड़मेर निवासी हेड कॉन्स्टेबल सांवलाराम विश्नोई की पार्थिव देह को सुबह बीएसएफ के 83 सेक्टर में श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद पार्थिव देह बाड़मेर में शहीद सर्किल, चौहटन सर्किल, कुर्जा फांटा, सनावड़ा, मेहलू होते हुए गुढ़ामलानी स्थित उनके पैतृक गांव बांड पहुंचा। राष्ट्रीय सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
– पति को देखकर वंदे मातरम के नारे लगाने लगीं पत्नि
इससे पहले सीकर निवासी हेड कॉन्स्टेबल शिशुपाल सिंह (45) का पार्थिव शरीर विभिन्न इलाकों से होता हुआ उनके गांव बागड़ियों का बास पहुंचा। शिशुपाल को देखकर पूरा परिवार भावुक हो गया। पत्नि कमला देवी अपने पति को देखकर वंदे मातरम के नारे लगाने लगीं। फिर भावुक हो गईं। उन्होंने पति के करीब जाकर उन्हें सैल्यूट किया। घर से अंतिम यात्रा अंत्येष्टि स्थल पहुंची और बेटे प्रशांत ने उन्हें मुखाग्नि दी। शहीद शिशुपाल की बेटी कविता ने कहा मेरे पापा ने हमसे ज्यादा समय अपनी नौकरी को दिया। पापा की शहादत के बाद हम लोग 6 दिन तक जयपुर में रहे, लेकिन हमें कोई भी पूछने के लिए नहीं आया। यहां तक कि हमें यह भी नहीं बताया गया कि पापा की पार्थिव देह कब आएगी। पापा की कांगो में शहादत के मामले की जांच होनी चाहिए। साथ ही जो सैनिक ड्यूटी में लगे रहते हैं। उनकी भी सुरक्षा की जिम्मेदारी होनी चाहिए। शिशुपाल की वीरांगना कमला देवी ने कहा मुझे गर्व है कि मेरे पति ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में शहादत दी है। वीरांगना ने कहा हमारे परिवार के 11 लोग देश सेवा में शामिल हैं। उन्हें सबसे बड़ा दुख इस बात का है कि पति की मौत के 6 दिन में कोई भी जनप्रतिनिधि उनसे मिलने के लिए नहीं आया। यहां तक कि पीसीसी चीफ और लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने भी हमारी कोई सुध नहीं ली। वीरांगना ने कहा मेरी केंद्र और राज्य सरकार से मांग है कि देश के सैनिकों की सुरक्षा की भी जिम्मेदारी होनी चाहिए। साथ ही मेरे पति जो शांति मिशन में इस तरीके से शहीद हुए हैं। इसकी भी जांच होनी चाहिए।
– परिवार को कोई समस्या नहीं आने दी जाएगी
पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा- इस परिवार के लिए सभी राजनीतिक दल एक साथ खड़े हैं। शहीद परिवार को किसी भी तरीके की कोई समस्या नहीं आने दी जाएगी। वहीं शहीद वीरांगना की बात पर जवाब देते हुए कहा कि मैं कोविड पॉजिटिव था। ऐसे में नहीं आ सका। डोटासरा ने कहा कि गांव की स्कूल का नामकरण शहीद शिशुपाल किया जाएगा। साथ ही शहीद की बेटी कविता जो डॉक्टर है, जिसकी बात को ध्यान में रखते हुए पीएचसी खोली जाएगी। वहीं पूर्व सैनिक कल्याण बोर्ड अध्यक्ष ने शहीद की मूर्ति बनवाने की घोषणा की है।
– सेना में भेजूंगी दोनों बेटे
मुझे बहुत खुशी हुई कि देश सेवा के साथ संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में बेटा शहीद हो गया। मैं अपने पोतों को भी कहता हूं कि फौजी बनकर देश की सेवा करो। बेटे के शहादत पर ये भावनाएं एक पिता की हैं। यह देश और अपने फर्ज के प्रति सिर्फ शहादत की नहीं, बल्कि परिवार के शौर्य की कहानी कह रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में अफ्रीका के कांगो (डीआर) में तैनात सीमा सुरक्षा बल के भारतीय जवान सांवलाराम विश्नोई 26 जुलाई को हिंसक प्रदर्शन के दौरान शहीद हो गए। जब भास्कर ने शहीद के पिता से बात की तो वे नम आंखो से बोले- सांवलाराम जब भी छुट्टी पर घर आते तब देश की सेवा की बातें करते थे। पत्नी से कहते थे- ‘मैं रहूं या न रहूं, सैनिक की पत्नी हो, हमेशा गर्व से रहना।’
अभिनव के साथ बैठी सांवलाराम विश्नोई की पत्नी रुखमणी बेटे को बोलता देख भावुक हो गईं। उन्होंने कहा- हमेशा बोलते थे कि आप सैनिक की पत्नी हो, हमेशा गर्व से रहना होगा। भरोसा नहीं है। हम घर वापस आ पाएंगे या नहीं। बच्चों व परिवार को तुम्हें ही संभालना है। अगर देश की रक्षा करने के दौरान कुछ हो जाए तो बेटे अक्षय का कहना है कि कांगो जाने से पहले पापा अप्रैल में घर पर छुट‌्टी पर आए थे। तब लास्ट मुलाकात हुई थी। मेरा एडमिशन नागौर स्कूल में करवा दिया था। 26 जुलाई को मेरी बात हुई थी। तब कहा था- वहां से सक्सेस बनकर ही निकलना।

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