In the case of misdemeanor, 17 people, including former Union Minister Nihalchand Meghwal, Jogeshwar Garg, Additional District and Sessions Court, Judge Ranjana Saraf, in the Seven -7 Jaipur Metro, gave great relief
In the case of misdemeanor, 17 people, including former Union Minister Nihalchand Meghwal, Jogeshwar Garg, Additional District and Sessions Court, Judge Ranjana Saraf, in the Seven -7 Jaipur Metro, gave great relief

-महिला की रिवीजन भी अपील कोर्ट से खारिज
जयपुर। दुष्कर्म मामले में पूर्व केन्द्रीय मंत्री निहालचंद मेघवाल, जोगेश्वर गर्ग सहित 17 लोगों को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय, क्रम-7 जयपुर मेट्रो में जज रंजना सराफ ने बडी राहत देते हुए शनिवार को पीडित महिला की ओर से 21 फरवरी, 2०14 को पेश की गई रिवीजन को अपील कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने आदेश में कहा कि घटना को लेकर महिला सिरसा-हरियाणा के डबवाली थाने में एफआईआर करा चुकी थी। ऐसे में कानूनन एक घटना को लेकर दो एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती। अदालत में पूर्व केन्द्रीय मंत्री निहालचंद की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट में वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता ए.के. जैन एवं वकील शंकरलाल गुर्जर ने पैरवी की। महिला की ओर से वकील चन्दूराम यादव ने पैरवी की।

प्रकरण के अनुसार गंगानगर हाल सिरसा निवासी महिला ने वर्ष 17 नवम्बर, 2०11 को वैशाली नगर थाने में निहालचंद, जोगेश्वर गर्ग, उसके पुत्र प्रकाश पुंज, अपने पति ओमप्रकाश गोदारा, देवर राजकमार, राजस्थान विवि के पूर्व अध्यक्ष पुष्पेन्द्ग भारद्बाज, आरपीएस अनिल राव, सतीश सिंगोदिया, विवेकानंद, विकास अग्रवाल, आरिफ, हरीश, कुलदीप हुन्दल, भगवान, मनीष, पिंटू, कुलदीप सहित 17 लोगों के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। इससे पूर्व महिला ने 1 अक्टूबर को डबवाली थाने में एफआईआर दर्ज करा चुकी थी। 2० दिसम्बर, 2०1० को उसकी शादी हुई थी। जयपुर की रिपोर्ट में आरोप था कि उसका पति ही अपने राजनीतिक और व्यावसायिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उसे नशा कराता था और अन्य लोग बेहोशी की हालत में उसके साथ दुष्कर्म करते थे।

बाद जांच गैर इलाका मानते हुए पुलिस ने वर्ष 2०12 में मामले में एफआर लगा कर कोर्ट में पेश कर दी। पीडिता की ओर से एफआर के खिलाफ 28 जनवरी, 2०13 को कोर्ट में प्रोटेस्ट पिटिशन दायर की गई। लेकिन एमएम-11 कोर्ट ने भी 1० फरवरी 2०14 को प्रोटेस्ट पिटिशन खारिज कर एफआर स्वीकार कर ली। इस आदेश के खिलाफ महिला ने डीजे कोर्ट में रिवीजन दायर की थी।

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