राजधानी जयपुर के महेश नगर थाना क्षेत्र से एक अधिवक्ता की दो नाबालिग बच्चियां 47 दिन से लापता है। इतने दिनों के बाद भी पुलिस बच्चियों तक पहुंच नहीं पा रही है और ना ही उनके गायब होने के पीछे के षड्यंत्र की तह तक पहुंच पाई है। परिजन तो हैरान परेशान है, साथ ही बच्चियों की गुमशुदगी मीडिया व सोशल मीडिया में आने के बाद से हर शहरवासी परिजनों के दुख में शरीक है। सामाजिक संगठन और बार एसोसिएशन जयपुर ने बच्चियों की बरामदगी को लेकर पुलिस और सरकार पर दबाव भी बना रही है। आज वकीलों ने जयपुर में बड़ा प्रदर्शन भी किया है। साथ ही सरकार व पुलिस को चौबीस घंटे का अल्टीमेटम दिया है। वैसे पुलिस भी जोर-शोर से बच्चियों की तलाश में जुटी है। दोनों बच्चियां अंतिम बार लखनऊ रेलवे स्टेशन पर देखी गई है। वहां ट्रेन से उतरने और ऑटो ेंमें बैठकर जाने के सीसीटीवी फुटेज सामने आ चुके हैं। फुटेज के आधार पर जयपुर पुलिस की टीमें स्थानीय पुलिस की मदद से बच्चियों की तलाश में लगे हुए हैं। परिजन भी पुलिस के साथ है। मुख्य मार्गों, गली-मोहल्लों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। होटल, गेस्ट हाउस व धर्मशाला की चैकिंग की जा रही है। जगह-जगह इश्तेहार लगाए गए हैं। 51 हजार रुपये का ईनाम भी रखा गया है। बच्चियों की जानकारी देने वालों के लिए। पुलिस ने कई टीमें बनाई है, जो पल पल की रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। हालांकि काफी प्रयासों के बाद भी बच्चियों की जानकारी नहीं मिलने से परिजन व परिचित दुखी है, साथ ही पुलिस भी बच्चियों को ढूंढ पाने में नाकाम रहने से परेशान है। अब विरोध प्रदर्शनों ने पुलिस की चिंता ज्यादा बढ़ा दी है। पुलिस को चौबीस घंटे का टाइम दिया है, बच्चियों को सही सलामत लाने का। बच्चियों की बरामदगी को लेकर वकीलों ने हाईकोर्ट के सामने बड़ा प्रदर्शन करते हुए मार्ग को जाम किया। पुलिस की कार्यशैली को लेकर नाराजगी दिखाई। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को साफ कह दिया है कि अगर बच्चियां नहीं मिली तो आंदोलन तेज किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की रहेगी। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने जांच में ढिलाई बरती। लखनऊ के फुटेज भी पुलिस को देने के बाद भी त्वरित कार्यवाही नहीं की। परिजन व परिचित अपने स्तर पर बच्चियों को ढूंढने में लगे हैं। वीडियो फुटेज खंगाले रहे हैं, लेकिन पुलिस पर्याप्त सहयोग नहीं कर रही है। यहीं कारण है कि 47 दिन के बाद भी बच्चियां लापता है। परिजनों को डर है कि उनके साथ कोई अनहोनी ना हो जाए। ऐसे संवेदनशील मसलों में पुलिस को त्वरित कार्यवाही करनी चाहिए। परिजनों को यह आभास नहीं होना चाहिए कि पुलिस उनके प्रति संवेदनशील नहीं है, बल्कि उनके दुख दर्द में साथ है और बच्चियों को तलाशने में पूरी ताकत से लगी हुई है। बच्चियों की तलाश के लिए डीजीपी ने एसआईटी का गठन किया है, जिसमें आला अधिकारियों के साथ तकनीकी व ऑपरेशनल टीम भी रखी गई है। उम्मीद है कि एसआईटी के गठन के बाद राजस्थान पुलिस बच्चियों की सही सलामत तलाश कर पाएगी।

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