– दावा किया जा रहा है कि यह दुनिया के सबसे बड़े मेडिटेशन सेंटर है
वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 और 18 दिसंबर को वाराणसी में रहेंगे। पीएम बनने के बाद काशी का यह उनका 43वां दौरा है। पीएम का यह दौरा निजी तौर पर भी उनके लिए बेहद अहम है। क्योंकि, पीएम यहां स्वर्वेद विहंगम योग संत समाज द्वारा निर्मित स्वर्वेद महामंदिर का इनॉगरेशन करेंगे। दावा किया जा रहा है कि यह दुनिया के सबसे बड़े मेडिटेशन सेंटर है। महामंदिर के 100वें वार्षिकोत्सव में शामिल होंगे। इस महामंदिर का निर्माण कराने वाले स्वर्वेद विहंगम योग संत समाज से पीएम के परिवार का पुराना संबंध है। पीएम की मां स्वर्गीय हीराबेन और भाई पंकज मोदी की आस्था का केंद्र स्वर्वेद विहंगम योग संत रहा है। पीएम की मां हीराबेन अंतिम सांस तक विहंगम योग गुरुओं से जुड़ी रहीं, तो पीएम के भाई पंकज मोदी कई समागम में शामिल हो चुके हैं। पीएम का इस महामंदिर से भावनात्मक जुड़ाव भी है। महामंदिर से जुड़े लोगों ने बताया कि पीएम की मां हीराबेन स्वर्वेद महामंदिर ट्रस्ट और संत समाज से जुड़ी थीं। लंबे समय तक वह विहंगम योग संत समाज की अनुयायी रहीं। वे सद्गुरु सदाफलदेव जी महाराज की उपासक थीं। स्वर्वेद के प्रथमाचार्य धर्मचंद्रदेव का साहित्य पढ़ती थीं। करीब 30 साल तक स्वर्वेद महामंदिर की अनुयायी रहीं हीराबेन पहले के समागमों में भी शामिल रहती थीं। जब सद्गुरू आचार्य स्वतंत्रदेव महाराज गुजरात पहुंचे थे, तो उनसे मुलाकात की थी। उन्होंने हीराबेन को आशीर्वाद दिया। बुकलेट और स्मृति चिह्न भेंट किया। तब उनके बेटे पंकज मोदी भी साथ थे। पीएम गेस्ट हाउस से 18 दिसंबर की सुबह हेलिकॉप्टर से उमरहां पहुंचेंगे। यहीं, स्वर्वेद महामंदिर का निर्माण हुआ है। पीएम इसका लोकार्पण करके लोगों से संवाद करेंगे। स्वर्वेद के उद्घाटन समारोह में 3 लाख लोग जुटेंगे। उत्तर प्रदेश के अलावा गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार से बड़ी संख्या में अनुयायी पहुंच रहे हैं। इसके अलावा, कई देशों इटली, जर्मनी, कनाडा, सिंगापुर, मलेशिया, इंडोनेशिया और अमेरिका से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। साल 2021 में काशी में ही विहंगम योग संत समाज का 98वां वार्षिकोत्सव हुआ था। इसमें सद्गुरु सदाफलदेव महाराज के अनुयायियों को पीएम मोदी ने भी संबोधित किया था। महामंदिर से जुड़े संत ने बताया कि गुजरात पहुंचने पर पीएम ने अपनी मां हीराबेन को वाराणसी में बनने वाले विशाल स्वर्वेद महामंदिर के बारे में बताया था। मंदिर निर्माण का प्रबंधन संभाल रहे गुजरात के व्यवसायी चिराग पटेल ने बताया, “पूरी दुनिया में बिना कमरों का सात मंजिला मेडिटेशन सेंटर कहीं नहीं है। बेहतरीन स्टोन मार्बल और अत्याधुनिक लाइटें मंदिर की सुंदरता बढ़ाती हैं। वार्षिकोत्सव में महामंदिर में 25000 कुंडी स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ होगा। इसमें विज्ञान देव महाराज मंदिर से जुड़े तीन लाख श्रद्धालु शिरकत करेंगे। चिराग पटेल ने बताया कि स्वर्वेद महामंदिर 20 साल से बना रहा है। 3 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में श्वेत मकराना संगमरमर से तैयार होने वाले नक्काशीदार गुलाबी सैंडस्टोन बनाया गया है। इसमें 9 कमल हैं। जो स्वर्वेद के सिद्धांत के अनुसार हैं। इसमें बड़े कमल में 125 पत्तियां हैं। स्वर्वेद जो ग्रंथ हैं, उसके ऊपर स्वामी सदाफल महाराज ने 17 साल साधना करके हिमालय की गुफा में इसकी रचना की थी। जो दोहे उन्होंने ध्यान में देखे उन पर ग्रंथ लिखा। अब इन दोहों को अंदर अंकित किया गया है।

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