जयपुर। राजस्थान विधानसभा में बाड़मेर के पेयजल प्रोजेक्ट मामले में भाजपा सदस्य कैलाश चौधरी ने पीएचईडी सचिव संदीप वर्मा पर आरोप लगाते हुए कहा कि 12 सौ करोड़ रुपए के पेयजल प्रोजेक्ट करीब-करीब पूरा हो चुका है। मात्र एक सौ करोड़ रुपए के टेण्डर होने हैं, लेकिन सचिव संदीप वर्मा टेण्डर जारी नहीं कर रहे हैं और फाइल को दबाकर बैठे हैं। प्रोजेक्ट टेण्डर में देरी के चलते राज्य सरकार का पेयजल प्रोजेक्ट रुका हुआ है। इससे लोगों को पेयजल मिलने में देरी हो रही है। सदन के बाहर मीडिया से बातचीत में कैलाश चौधरी ने कहा कि संदीप वर्मा पेयजल प्रोजेक्ट की कंपनी को दबाव में लेने के लिए 100 करोड़ रुपए के टेण्डर को स्वीकृत नहीं दे रहे हैं। इससे बाड़मेर और वहां के लोगों के पेयजल के लिए महत्वपूर्ण यह प्रोजेक्ट अटका पड़ा है। जबकि 90 फीसदी काम पूरा हो गया है। टेण्डर रोक रखने से काम ठप पड़ा है।
– जलदाय मंत्री के कक्ष में हॉट-टॉक
बताया जाता है कि कैलाश चौधरी के इस मामले को लेकर सदन परिसर में जलदाय मंत्री सुरेन्द्र गोयल के कक्ष में संदीप वर्मा को बुलाया गया और भाजपा विधायक कैलाश चौधरी के आरोपों के बारे में जवाब मांगा। इस दौरान कैलाश चौधरी भी वहां मौजूद थे। चर्चा है कि आरोपों के संबंध में चौधरी और वर्मा के बीच गरमागरम बहस हुई है। कैलाश चौधरी ने पेयजल प्रोजेक्ट में देरी को लेकर संदीप वर्मा को खरी-खरी सुनाई। मामले में जलदाय मंत्री सुरेन्द्र गोयल ने संदीप वर्मा को रुके पड़े प्रोजेक्ट कार्य को जल्द शुरु करने के आदेश दिए हैं। उधर, जलदाय विभाग में भी इसकी खूब चर्चा है।  विभाग में यह भी चर्चा है कि जलदाय विभाग में जितने भी घोटाले सामने आ रहे हैं, उनमें से कई मामलों की जांच संदीप वर्मा कर रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि भ्रष्टाचार के आरोप साबित होने पर भी दोषी अफसरों को बचाया जा रहा है और उन्हें क्लीन चिट दी जा रही है। इस संबंध में एसीबी में भी शिकायतें दी गई हैं।

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