जयपुर। भले ही पीएम नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी के माध्यम से आतंकियों को होने वाली फंडिंग पर करारी चोट दी हो। लेकिन जिस लिहाज से अजमेर की क्लॉक टॉवर थाना पुलिस ने नकली नोटों के मामले में 4 आरोपियों को पकड़ा है।

उससे स्थिति यही बयां कर रही है कि सीमा पार नकली नोट छापने के कारखाने अभी बंद नहीं हुए हैं। ये नकली नोट हुबहु असली नोटों जैसे ही है। जिसे पहचान पाना टेड़ी खीर जान पड़ता है। आरोपियों से हुई प्रारंभिक पूछताछ के बाद जो जानकारी सामने आई है, उसके बाद तो आईबी सहित अन्य एजेंसियों के भी कान खड़े हो गए हैं। नोटबंदी के बाद नकली नोटों की खेप पकड़े जाने की संभवत: यह पहली घटना है।

-4 आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा
पुलिस ने बताया कि अजमेर के क्लॉक टॉवर थाने के केसरगंज चौकी प्रभारी सहायक उपनिरीक्षक राजाराम को मुखबिर ने सूचना दी कि कुछ लोग नकली नोटों को बाजार में चलाने की फिराक में है। इस पर पुलिस ने दबीश देकर बिहार निवासी चार आरोपियों मोहम्मद जसीम अंसारी, मोहम्मद आफताब आलम, मोहम्मद सौहेल आलम और समरज आलम को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से 2-2 हजार रुपए के कुल 84 हजार रुपए के नकली नोट भी बरामद किए। आरोपी पिछले 4 दिन से अजमेर में ही डेरा जमाए हुए थे। पूछताछ में सामने आया कि चारों युवक 2000 रुपए का नोट देकर दुकानदारों से कम कीमत का सामान लेते और बदले में असली रकम जमा कर रहे थे। अब तक ये 16 हजार के नकली नोट बाजार में चला चुके हैं।

-सरहद पार से आने लगे नकली नोट
आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि ये नकली नोट सरहद पार पाकिस्तान और बांग्लादेश से आ रहे हैं। खास बात यह है कि अब तक तो नई करेंसी स्कैनर या फोटोकॉपी से ही नकली बनाई जा रही थी, लेकिन ये नोट मशीन से छपे हुए हैं, जो हूबहू असली जैसे ही प्रतीत होते हैं। सीमा पर भारत में प्रचलित नई करेंसी की भी नकल छापने के कारखाने खुले हुए हैं। जो नेपाल और पश्चिम बंगाल के रास्ते भारत में लाई जा रही है।

-दामाद ससुर मिलकर करते हैं नकली नोटों का काम
पुलिस गिरफ्त में आए आरोपियों का मास्टरमाइंड बिहार के मधेपुरा स्थित मंजोर बाजार थाना बिहारीगंज निवासी मोहम्मद यासीन अंसारी है। जो इन दिनों पुलिस की रिमांड पर है। जहां उसका ससुर पीर मोहम्मद मुख्य डीलर है। पीर मोहम्मद ने ही जाली नोटों को देश के विभिन्न शहरों में खपाने के लिए एजेंट बना रखे हैं। इन एजेंटों को अपने काम के बदले में 50 फीसद राशि दी जाती है। वहीं एजेंटों ने अपने स्तर पर नकली नोट चलाने वालों की भर्ती कर उन्हें वेतन पर रखा हुआ है। पकड़े गए आरोपी मोहम्मद आफताब आलम, मोहम्मद सोहल आलम और समरज आलम वेतन पर ही नकली नोट खपाने का काम कर रहे थे।

-सर्तक हुई एजेंसियां
आरोपी युवकों से हुई पूछताछ में सामने आया कि देशभर में अब तक लाखों रुपए के नकली नोट बाजार में खपाए जा चुके हैं। ऐसे में इस तथ्य के उजागर होने के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। वहीं आईबी ने भी युवकों से गहनता से पड़ताल करना शुरू कर दिया है। ताकि इनके नेटवर्क को तोड़ा जा सके।

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