जयपुर। आज चौदह नवम्बर को चांद पूरे आकार में रहेगा। आज की रात पूरे यौवन में चांद नजर आएगा। 14 नवंबर को होने जा रहा सुपरमून अन्य दिनों की अपेक्षा 30 फ ीसद अधिक खुबसूरत नजर आने वाला है। चंद्रमा में यह निखार 68 साल बाद नजर आएगा। सुपरमून शब्द का प्रयोग 1979 से शुरू हुआ। इसे ज्योतिषी रिचर्ड नौले प्रयोग में लाए। सुपरमून तब बनता है, जब चांद पूर्णिमा के समय अपनी निकटतम स्थिति के 90 फ ीसद या उससे भी अधिक भीतर आ जाता है। इस बार वह अपनी कक्षा मे चक्कर लगाते हुए पृथ्वी के बेहद करीब आ रहा है। इस कारण वह आकार में दूर की स्थिति की तुलना 14 फ ीसद बड़ा नजर आने वाला है। यह नजारा बेदह अनूठा होने जा रहा है। इसे कैमरे में कैद करने के लिए चंद्रमा पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों व चित्रकार तैयारियों में जुट गए हैं। 14 नवंबर को पूरी रात चांद अपनी चमक से पृथ्वी को भी रोशन करेगा। इस बार का सुपरमून दिलकश नजारा लेकर आने वाला है। इसका समुद्र में उठने वाले ज्वार पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ता। सुपरमून को लेकर भूकंप या सुनामी आने की बाते कही जाती है, जो निराधार है।

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