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जयपुर। नगर निगम सिविल लाइन जोन के अफसरों की दरियादिली कहे या कमीशनखोरी में लिप्तता इन्होंने जोन में खड़े हो रहे एक अवैध कॉमर्शियल पर बड़ी मेहरबानी दिखा रखी है। अवैध कॉमर्शियल इमारत खडी कर रहा शख्स एक चिकित्सक बताया जाता है, जिसने करीब चार सौ वर्गगज का भूखण्ड खरीदकर अवैध निर्माण में लगा हुआ है। यह अवैध निर्माण राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान शुरू हुआ, जो अब तीसरी मंजिल तक पहुंच गया है। नगर निगम के अफसरों व कर्मचारियों की मिलीभगत से अवैध निर्माण हो रहा है। यह अवैध निर्माण सिविल लाइन नगर निगम जोन कार्यालय के प्रताप नगर आवासीय कॉलोनी में हो रहा है। खातीपुरा रोड स्थित प्रताप नगर आवासीय कॉलोनी के ग्रेनेड मार्ग के कॉर्नर पर स्थित भूखण्ड सं या एक पर यह अवैध निर्माण गत एक महीने से चल रहा है। अवैध कॉमर्शियल इमारतें के लिए ना तो नगर निगम से भवन निर्माण की अनुमति ली गई है और ना ही जिस भूखण्ड पर अवैध निर्माण चल रहा है, उसका विभाजन करवाया गया है। यह भूखण्ड पहले एक शख्स के नाम था, लेकिन इसमें बड़ा हिस्सा डॉक्टर साहब ने खरीद लिया। अभी तक भूखण्ड का विभाजन नहीं हुआ है, लेकिन निगम अफसरों की मिलीभगत से बिल्डिंग खड़ी की जा रही है। यहां अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटर बनाया जाएगा। भवन निर्माण नियमों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही है। ना तो सेटबैक का ध्यान रखा जा रहा है और ना ही पार्किंग जैसी सुविधाएं रखी गई है।

अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटर बिल्डिंग बनाने से पहले अग्निशमन, पॉल्यूशन बोर्ड से अनुमति नहीं ली गई है। इस अवैध निर्माण से अभी से आवासीय कॉलोनी की शांति भंग होने लगी है। इस अवैध निर्माण की शिकायत करने वाले जितेन्द्र सिंह का आरोप है कि अवैध निर्माण के बारे में नगर निगम विजीलैंस शाखा के आयुक्त बाघ सिंह, अतिक्रमणरोधी शाखा को कई बार लिखित शिकायत दी जा चुकी है और व्यक्तिगत मिलकर भी अवैध निर्माण के बारे में बताया जा चुका है, लेकिन अफसर यहां आते हैं और बिना कार्रवाई के ही चले जाते हैं। अवैध निर्माण की शिकायत पर नगर निगम प्रशासन में गार्ड लगाने का प्रावधान है, लेकिन मिलीभगत के चलते यहां गार्ड भी नहीं लगाया गया है। अवैध निर्माण को रोकने के बजाय नगर निगम के अफसर कह रहे हैं कि यह बिल्ंिडग डॉक्टर साहब की है। हमें ऊपर से आदेश है कि कोई कार्रवाई मत करो। उधर, इस अवैध निर्माण को रोकने के लिए लोकायुक्त राजस्थान और नगर निगम कोर्ट में परिवाद दाखिल किया जाएगा, जिससे अफसरों की लिप्तता पर भी कार्रवाई हो सके। साथ ही अवैध निर्माण सीज किया जा सके।

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