Sambhar lake, birds die

जयपुर। सांभर झील क्षेत्र में खोली गई होटल और मिनी ट्रेन चलाने की गतिविधियां बंद होगी. वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री सुखराम विश्नोई ने मंगलवार को विधानसभा में बताया कि पिछले पांच साल में सांभर झील क्षेत्र में खोदे गए अवैध कुएं-ट्यूबवेल और होटल को बंद करने की कार्यवाही की जा रही है। विश्नोई ने सदन में सांभर क्षेत्र में पक्षियों की मृत्यु के सम्बंध में उठाये गये मुद्दे पर अपना वक्तव्य देते हुए बताया कि झील क्षेत्र में पिछले पांच साल में अंधाधुंध ढंग से अवैध कुएं और ट्यूबवेल खोदकर नमक खनन किया गया। हमारी सरकार इन्हें निरन्तर बन्द करने की कार्यवाही कर रही है। उन्होंने बताया कि गत सरकार के समय एक निजी फर्म ने बिना वन एवं पर्यावरण अनुमति लिए होटल खोल ली और मिनी ट्रेन चलाने सहित अन्य गतिविधियां चालू कर दी। इन्हें भी बंद करने की कार्यवाही की जा रही है।

वन राज्य मंत्री ने बताया कि राज्य के जयपुर, अजमेर एवं नागौर जिलों में लगभग 230 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली सांभर झील एक राजस्व क्षेत्र है, जिसका कुछ हिस्सा नमक बनाने के लिए केन्द्र सरकार के उपक्रम सांभर साल्ट्स लिमिटेड को पट्टे पर दिया गया है। उन्होंने बताया कि पक्षियों की मृत्यु की रिपोर्ट मिलने पर राजस्व और पशु चिकित्सा अधिकारियों के एक दल ने गत वर्ष 10 नवम्बर को क्षेत्र का दौरा किया और बर्ड फ्लू की जांच के लिए नमूने एकत्रित किये। वन विभाग के समीपस्थ दूदू रेंज के स्टॉफ को भी इस कार्य में सहयोग के लिए लगाया गया एवं काचरोदा नर्सरी में एक रेस्क्यू सेंटर स्थापित किया गया।

उन्होंने बताया कि जयपुर व नागौर जिले के राजस्व कर्मी, नगर पालिका के कर्मचारी, वन विभाग व पशु पालन विभाग के कर्मी, SDRF, नागरिक सुरक्षा कर्मी, चिकित्सकों ने स्थल पर लगातार शव एकत्र किये। साम्भर साल्ट के कर्मचारियों और स्वयंसेवी संस्थाओं (रक्षा, वाइल्ड लाइफ क्रियेचर ऑर्गेनाइजेशन, वाइल्ड ट्रस्ट ऑफ इण्डिया और होप एंड बियॉन्ड) ने भी इस कार्यवाही में सहयोग दिया। अजमेर जिले में भी मॉनिटरिंग कार्य लगातार सम्पादित किया गया।

विश्नोई ने बताया कि उन्होंने स्वयं और कृषि मंत्री श्री लालचंद कटारिया तथा वन, पशुपालन एवं सभी सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने क्षेत्र का निरन्तर दौरा किया तथा मुआयना कर निस्तारण एवं रेस्क्यू कार्य देखा। मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने भी निरन्तर स्थिति पर नजर रखी। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की टीम ने भी प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया।

विश्नोई ने बताया कि राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग केंद्र, भोपाल सेे प्राप्त रिपोर्ट में पक्षियों में बर्ड फ्लू नहीं पाया गया है। राजूवास बीकानेर से आये विशेषज्ञ ने बोट्यूलिज्म नामक बीमारी की पूर्ण सम्भावना जताई। इसलिए अन्य स्वस्थ पक्षियों के बीमार होने की आशंका को देखते हुए पक्षियों के शवों को शीघ्रातिशीघ्र दफनाया गया। इंडीयन वेटरनरी रिसर्च संस्थान बरेली को पक्षियों में हुई बीमारी की पुष्टि के लिए नमूने भेजे गये थे, जिनकी रिपोर्ट में एवियन बोट्यूलिज्म रोग की पुष्टि की गई।

उन्होंने बताया कि बोट्यूलिज्म बेक्टिरिया के बताये कारणो में नये क्षेत्रों में पानी का भराव, पानी के स्तर में उतार-चढ़ाव तथा नमक की सांद्रता में बदलाव हो सकता है। यह बीमारी उत्तरी अमेरिका, यूरोप आदि में भी होती है तथा इस रोग से उन क्षेत्रों में लाखों की संख्या में पक्षी मरते हैं। श्री विश्नोई ने बताया कि पक्षियों की मृत्यु के संबंध में एक प्रकरण उच्च न्यायालय, जयपुर में लंबित है। इसके साथ ही इस विषय में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में भी एक प्रकरण विचाराधीन है। इस पर उत्तर प्रस्तुत किया जा चुका है।

वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री ने बताया कि इस क्षेत्र में मुख्यतः केन्द्र सरकार के उपक्रम सांभर साल्ट लिमिटेड का अधिकार है जिनके द्वारा नमक उत्पादन के अतिरिक्त किसी निजी संस्था से करार कर पर्यटन गतिविधियां आरम्भ की गई, जिसका दुष्प्रभाव विचारणीय हो सकता है। कुछ क्षेत्रों में नमक उत्पादन के लिये स्थानीय लोगों को बिना किसी योजना बनाये अथवा इसके परिणामों की परीक्षा किये बिना पट्टे जारी करने के संबंध में सूचना उद्योग विभाग से मंगाई जा रही है।

श्री विश्नोई ने बताया कि प्रदेश में स्टेट वेटलेण्ड अर्थोरिटी का गठन गत वर्ष 27 नवम्बर को किया गया है। यह केन्द्र सरकार वेटेलेण्ड्स रूल्स 2017 के अन्तर्गत किया गया है। इसका कार्य राज्य वेटलेण्ड्स के संरक्षण एवं सतत् प्रबंध को प्रोत्साहित कराना है। उन्होंने बताया कि सांभर झील के संबंध में स्टेडिंग कमेटी फोर मैनेजमेन्ट ऑफ सांभर लेक का गठन गत 24 दिसम्बर को कर दिया गया है। यह कमेटी विभिन्न संबंधित विभागों द्वारा सांभर झील के प्रबंध को मॉनीटर करेगी तथा वेटलेण्ड्स अथोरिटी के निर्णयों को लागू करेगी। आज भी मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इस कमेटी की प्रथम बैठक आयोजित की गई।

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