fci chairmen rahul
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-राकेश कुमार शर्मा

जयपुर। राजस्थान वेयरहाउस का चेयरमैन बनाने के नाम पर जयपुर के एक ओर बिल्डर को झांसा देकर करोड़ों रुपए हड़पने का मामला सामने आया है। आरोपियों ने वेयरहाउस चेयरमैन बनाने के लिए उसे सत्तारुढ भाजपा मुख्यालय राजस्थान, केन्द्रीय मंत्रालय और केन्द्रीय मंत्री के एक पीए से मिलवाया। पैसे लेने के बाद भी कई महीनों तक नियुक्ति पत्र नहीं आया तो बिल्डर को ठगी का अहसास हुआ। बिल्डर राहुल द्विेदी ने शास्त्री नगर थाने में मामला दर्ज करवाया। मामले में तीन आरोपी है। एक आलोक पारीक पशुपालन विभाग में कार्यरत है तो दूसरा सामाजिक संगठन से जुड़ा हुआ और भाजपा में भी एक्टिव मेम्बर है। इसी तरह केन्द्रीय मंत्री का पीए बताने वाला शादाब दिल्ली का है। इन तीनों ने राहुल को चेयरमैन बनने का झांसा देकर पौने दो करोड़ रुपए हड़प लिए, हालांकि वास्तविक राशि इससे अधिक हो सकती है, जो पुलिस अनुसंधान में सामने आ सकती है।

बिल्डर राहुल द्विेदी दादी का फाटक मुरलीपुरा निवासी है। राहुल ने शास्त्री नगर थाने में मामला दर्ज करवाया है कि सरकारी कर्मचारी आलोक पारीक, सुनील मुदगल और शादाब ने उसे वेयरहाउस चेयरमैन बनाने का झांसा दिया। पार्टी फंड के नाम पर डेढ़ करोड़ रुपए लिए। यह राशि बैंक के माध्यम से सीधे तौर पर आरोपियों के खाते में जमा करवाई। पौने दो करोड़ रुपए की राशि जमा करवाने के बाद भी कई महीनों तक आरोपियों ने नियुक्ति पत्र नहीं दिया और वे आनाकानी करने लगे तो बिल्डर राहुल को संदेह हुआ। इन तीनों आरोपियों का पता लगाया तो ठगी होने की जानकारी मिली। शादाब ना तो केन्द्रीय मंत्रालय में था और ना ही सुनील मुदगल एफसीआई में था। आलोक पारीक ने सुनील को एफसीआई का बड़ा पदाधिकारी बताते हुए मिलवाया था। वे लाल-पीली बत्ती कार में आता था, जिसमें भारत सरकार लिखा रहता था। प्राथमिकी के मुताबिक, आलोक पारीक ने सबसे पहले भाजपा मुख्यालय में राहुल को चेयरमैन बनने का झांसा दिया था। इसके बाद राहुल ने आलोक को बीस लाख रुपए दिए और उसके बाद अन्य राशि भी बैंक खातों से माध्यम से दी। बताया जाता है कि सुनील मुदगल पहले भी एक आपराधिक मामले में पकड़ा जा चुका है। अपहरण से जुड़े एक मामले में सुनील ने फिरौती मांगी थी। वह भाजपा का एक बड़े पदाधिकारी और मंत्री के नजदीकी माना जाता है, साथ ही ब्राह्मण संगठनों से भी जुडा हुआ है। शादाब भी बीजेपी से जुड़ा है और दिल्ली का है। आलोक पारीक खुद को पशुपालन विभाग में अफसर बताते हुए राहुल से मिलता था, लेकिन राहुल ने जब इस बारे में पता लगवाया तो वह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी निकला, जो पशुपालन विभाग टोंक रोड में कार्यरत है। पुलिस ने मामला दर्ज कर चांज शुरु कर दी है। प्रकरण अनुसंधान के लिए एसआई बदरी प्रसाद मीना को दिया है। तीनों आरोपी फरार बताए जाते हैं। बैंक खातों की जांच से आरोपियों के खातों में करोड़ों रुपए पहुंचाने की बात सामने आ चुकी है।

– सीताराम बागड़ा को भी ठग चुके हैं
वेयर हाउस चेयरमैन बनाने के नाम पर जयपुर के ही एक नामी बिल्डर सीताराम बागड़ा को भी ठगा जा चुका है। वेयर हाउस चेयरमैन बनाने के लिए पौने चार करोड़ रुपए हड़प लिए थे सीताराम बागड़ा, लेकिन उसे चेयरमैन नहीं बनाया। सीताराम ने तकाजा किया तो उसे फर्जी नियुक्ति पत्र दे दिया। यह मामला मीडिया में आने के बाद फर्जीवाडे का खुलासा हुआ। सीताराम बागड़ा ने आरोपी राजकुमार बरनाड, पत्रकार सुभाष शर्मा और दिल्ली के कारोबारी व लाइजनर नवीन गोयल के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। इससे पहले केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय ने मीडिया खबरों के आधार पर दिल्ली में मामला दर्ज करवाया था। उस मामले में पुलिस ने सीताराम बागड़ा की गिरफ्तारी हुई, जबकि आरोपी फरार हो गए थे। जमानत होने पर सीताराम ने आरोपियों पर मुकदमा दर्ज करवाया। नवीन गोयल की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन अन्य आरोपी फरार है।

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