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जयपुर। छोटी काशी की पावन धरती जयपुर पर आराध्य देव गोविन्द देव जी के सानिध्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवको का विषाल घोष शिविर 2 से 5 नवम्बर तक केशव विद्यापीठ जामडोली में रहेगा। जिसमें लगभग 3 हजार घोष वादक भाग लेगें। उत्तम संचलन और सांघिक कार्यक्रमों में घोष की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। जयपुर प्रान्त बनने के बाद यह घोष का पहला विषाल शिविर होगा। गोविन्द देव जी की नगरी में सम्पन्न होने वाल इस शिविर को स्वर गोविन्दम्-2017 का नाम दिया गया है।

तीन दिन के इस शिविर के पश्चात घोष वादकों के पथ संचलन का कार्यक्रम गोविंद देव जी की नगरी में संपन्न होगा। घोष (बैण्ड) संघ में शारिरीक का अभिन्न अंग है। संघ के घोष में आनक (ड्रम), पणव (वास ड्रम), शंख (विगुल), वंषी, झांझ, त्रिभुज मुख्य वाद्य्यों के रूप में सम्मिलित है। साथ में तूर्य, स्वरद, नागांग, गौमुख भी शामिल है। इस शिविर के लिए एक गीत की रचना की गई है, जिसमें संघ के वर्तमान कार्य का स्वरूप, स्वयंसेवक के गुण एवं घोष का महत्व दर्शाया गया है। राजस्थानी बोली की मिठास से सजे इस गीत “कदम-कदम री साधना, आ देश री आराधना“ के रचयिता चुरू के गोपाल पारीक हैं तथा प्रसिद्ध राजस्थानी कलाकार लोकगायक प्रकाश माली ने इसे स्वर दिया है। कार्यक्रम तैयारी के चरण में 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सभी जिला केंद्रों पर शहीदों की स्मृति में पथ संचलन और स्थिर वादन किया जाएगा।

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