नई दिल्ली। देश का और एशिया का सबसे बड़ा धौला सादिया पुल बनकर तैयार है। शुक्रवार को पीएम नरेन्द्र मोदी इस पुल का लोकार्पण करेंगे। यह पुल असम के तिनसुकिया में बना है। जो ब्रह्मपुत्र नदी की सहायक नदी लोहित नदी पर बना है। इस पुल का निर्माण वर्ष 2011 में शुरू हुआ था। ब्रह्मपुत्र नदी पर बना यह पुल दक्षिणी तट पर धौला को उत्तरी तट सादिया से जोड़ेगा। 9.15 किलोमीटर लंबा यह पुल पूर्वी अरुणाचल में संचार क्रांति लेकर आएगा। 1 हजार करोड़ रुपए की लागत से बने इस पुल से अरुणाचल प्रदेश और असम के बीच की दूरी 5 घंटे और 165 किलोमीटर कम हो जाएगी। वहीं सामरिक महत्व से यह पुल भारतीय सेना के लिए मददगार ही साबित होगा। विशेषज्ञों ने इस पुल का निर्माण इस तरह से किया है कि यह सैन्य टैंकों का भार सहन कर सके। यह पुल भार क्षमता के लिहाज से 60 टन वजनी युद्धक टैंक का वजन आसानी से झेल सकता है। इस पुल के निर्माण के बाद अब सेना को असम से अरुणाचल स्थित भारत-चीन सीमा (किबिथू, वालॉन्ग व चागलगाम चौकी) तक पहुंचने में 3 से 4 घंटे कम ही लगेंगे। बोगीबील नामक एक पुल भी जल्द शुरू होने में है। इसके बाद पूर्वी अरुणाचल प्रदेश से ईटानगर जाने में जो 4 से 5 घंटे का समय कम हो जाएगा। यह पुल दिसपुर से 540 व ईटानगर से 300 किलोमीटर दूर है। चीन सीमा से हवाई दूरी महज 100 किलोमीटर से भी कम है। 1962 में चीन युद्ध के समय अगर यह पुल उपलब्ध होता तो स्थिति दूसरी होती। सेना को आसानी से गोला बारुद उपलब्ध होता तो सैन्य सहायता पहुंचाई जा सकती थी। पुल निर्माण के बाद अब सैन्य क्षमता में भी वृद्धि होगी। वहीं यह पुल असम के पूर्वी इलाके में विकास को गति देगा। यह इलाका वर्तमान में काफी पिछड़ा हुआ है। पुल का उपयोग होने से विकास को गति दी जा सकेगी।

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