deenadayaal upaadhyaay graam jyoti yojana mein andhakaar : blaikalist raghu sails par itanee meharabaanee kyon ?

जयपुर। बिजली कंपनियों में चहेती फर्मों को मोटा फायदा पहुंचाने के लिए पिछले कई सालों से नियम और शर्तों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही है। चहेती फर्मों का फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद भी बिजली कंपनियों के आलाधिकारी धृतराष्ट्र की तरह अंधे होकर कार्रवाई करने की बजाए उन्हें पूरा संरक्षण दे रहे हैं। मैसर्स स्वास्तिक इलेक्ट्रिकल्स के बाद बिजली कंपनियों में एक ओर बड़ी ठेका कंपनी मैसर्स रघु सैल्स कॉरपोरेशन एण्ड मैसर्स वेदप्रकाश एण्ड कंपनी का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। मैसर्स रघु सैल्स कॉरपोरेशन द्वारा बिजली कंपनियों के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना में जमकर फजीर्वाड़ा किया है। फर्म की ओर से अजमेर डिस्कॉम में भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ जिले में फर्जी दस्तावेजों से दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के 80 करोड़ के कार्य हासिल कर लिए। मैसर्स रघु सैल्स कॉरपोरेशन की ओर से फर्जीवाड़े का यह सारा खेल जयपुर और अजमेर डिस्कॉम के अधिकारियों की मिलीभगत से किया है। दरअसल अजमेर डिस्कॉम की ओर से दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ जिले में बिजली कार्यों के लिए टेंडर निकाला। टेंडर संख्या-44 की शर्तों के अनुसार ठेका फर्म को अधिशाषी अभियंता स्तर के अधिकारी से कार्यालय डिस्पेच नंबर और दिनांक के साथ जारी वर्क कम्प्लीशन सर्टिफिकेट को ही मान्य किया जाएगा। टेंडर में मैसर्स रघु सैल्स कॉरपोरेशन की ओर से लगाए गए दस्तावेजों में एक भी वर्क कम्प्लीशन सर्टिफिकेट पर कार्यालय के डिस्पेच नंबर नहीं थे, फिर भी अजमेर डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता डीडीयूजीजेवाई की ओर से इन फर्जी दस्तावेजों को मान्य कर दिया। टेंडर के समय ही फर्जी दस्तावेजों को लेकर अजमेर डिस्कॉम अधीक्षण अभियंता डीडीयूजीजेवाई को फर्जी वर्क कम्प्लीशन सर्टिफिकेट की शिकायत मय दस्तावेजों के साथ की गई, लेकिन एसई डीडीयूजीजेवाई की ओर से दस्तावेजों की जांच करने की बजाए मैसर्स रघु सैल्स कॉरपोरेशन के फर्जी दस्तावेजों को नजरअंदाज करते हुए 80 करोड़ के काम दे दिए। फजीर्वाड़ों के मामलों में कार्रवाई करने की बजाए जयपुर डिस्कॉम और अजमेर डिस्कॉम के अधिकारियों की मिलीभगत के चलते रघु सैल्स जैसी दर्जनों ठेका फर्मों द्वारा पहले तो फर्जी दस्तावेजों से करोड़ों रूपए के टेंडर हासिल कर लिए जाते हैं और फिर बिजली कार्यों में जमकर फर्जीवाड़ा कर राज्य और केन्द्र सरकार को करोड़ों रूपए का नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

अजमेर एमडी भामू की खास फर्मों में से एक है मैसर्स रघु सैल्स
ंमैसर्स रघु सैल्स कॉरपोरेशन और मैसर्स वेदप्रकाश एण्ड कंपनी का फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद जोधुपर डिस्कॉम की ओर से फर्म को पांचों बिजली कंपनियों में 5 साल के लिए ब्लैकलिस्ट करने के बाद भी फर्म को जयपुर डिस्कॉम और अजमेर डिस्कॉम में करोड़ों रूपए के काम दिए गए। बिजली कंपनियों के सूत्रों के अनुसार मैसर्स रघु सैल्स कॉरपोरेशन और मैसर्स वेदप्रकाश एण्ड कंपनी ऊर्जा राज्य मंत्री पुष्पेन्द्र सिंह राणावत और बिजली कंपनियों के सीएमडी आर.जी.गुप्ता की बेहद खास और करीबी फर्म मानी जाती है, तभी तो पांचों बिजली कंपनियों में ब्लैकलिस्ट होने के बाद भी जयपुर और अजमेर डिस्कॉम में फर्म को करोड़ों रूपए के काम दिए गए। ब्लैकलिस्ट होने के बाद भी जयपुर और अजमेर डिस्कॉम में मैसर्स रघु सैल्स कॉरपोरेशन को करोड़ों रूपए के काम देने की शिकायत ऊर्जा राज्य मंत्री पुष्पेन्द्रसिंह राणावत और बिजली कंपनियों के चैयरमेन हो करने के बाद भी न तो आज तक फर्म के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई और न ही दोषी अधिकारियों पर ही कोई कार्रवाई हुई। ऊर्जा राज्य मंत्री पुष्पेन्द्रसिंह राणावत और बिजली कंपनियों के चैयरमेन की मिलीभगत का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है। मैसर्स रघु सैल्स के पुराने दस्तावेजों को भी कर दिया मान्य
दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अजमेर डिस्कॉम के टेंडर संख्या-44 की शर्तों के अनुसार 1 अप्रेल, 2008 के बाद के ही दस्तावेज ही मान्य होंगे। चूंकि टेंडर क्वालिफिकेशन शर्तों में मैसर्स रघु सैल्स कॉरपोरशन पास नहीं हो रही थी, ऐसे में फर्म द्वारा 2007 का वर्क कम्लीशन सर्टिफिकेट लगा दिया, जिसे भी अजमेर डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता द्वारा मान्य कर दिया गया। फर्म की ओर से लगाए गए इन दस्तावेजों की शिकायत होने के बाद भी फर्म पर कोई कार्रवाई करने की बजाए, उसे फर्जीवाड़े पर पुरस्कृत करते हुए 80 करोड़ के काम सौंप दिए गए।

मैसर्स रघु सैल्स और वेदप्रकाश एण्ड कंपनी पर कार्रवाई कब ?
मैसर्स रघु सैल्स कॉरपोरेशन और वेदप्रकाश एण्ड कंपनी के फर्जीवाड़ों की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, ऊर्जा राज्य मंत्री, बिजली कंपनियों के सीएमडी, एसीबी, तीनों डिस्कॉम्स के एमडी सहित अन्य अधिकारियों से की गई, लेकिन जोधपुर डिस्कॉम की तत्कालीन एमडी आरती डोगरा के अलावा किसी भी अधिकारी द्वारा मैसर्स रघु सैल्स और वेदप्रकाश एण्ड कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। जोधपुर डिस्कॉम की तत्कालीन एमडी आरती डोगरा को जब मैसर्स रघु सैल्स के फर्जीवाड़े की शिकायत मिली तो उन्होंने तत्काल शिकायत की जांच करवाई। जांच में मैसर्स रघु सैल्स कॉरपोरेशन, मैसर्स वेदप्रकाश एण्ड कंपनी और मैसर्स आरडीजी इंटीरियर को पांचों बिजली कंपनियों में 5 साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया था। लेकिन तत्कालीन जोधपुर डिस्कॉम एमडी की ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई के बाद भी ऊर्जा राज्य मंत्री पुष्पेन्द्र सिंह राणावत, बिजली कंपनियों के चैयरमेन, जयपुर और अजमेर डिस्कॉम के एमडी द्वारा मैसर्स रघु सैल्स कॉरपोरेशन और मैसर्स वेदप्रकाश एण्ड कंपनी पर पूरी मेहरबानी की जा रही है। आखिरकार इतने सारे फर्जीवाड़े उजागर होने के बाद भी एक ब्लैकलिस्ट फर्म पर इन अधिकारियों की मिलीभगत और मेहरबानी का खेल कब तक जारी रहेगा। क्या वाकई में बिजली कंपनियों में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़ा करने वाली इन कंपनियों के बोलबाला और पैसा इतना बोलता है कि वे ऊर्जा राज्य मंत्री से लेकर सीएमडी और एमडी को अपनी जेबों से चलाते हैं।

ब्लैकलिस्ट होने के बाद भी रघु सैल्स का फजीर्वाड़े का खेल जारी
जोधपुर डिस्कॉम में फर्जी दस्तावेजों से करोड़ों के बिजली कार्य हासिल करने का मामला उजागर होने के बाद जोधपुर डिस्कॉम की तत्कालीन एमडी आरती डोगरा ने फर्म के दस्तावेजों की जांच करने के बाद फर्जीवाड़ा सामने आने पर मैसर्स रघु सैल्स कॉरपोरेशन और मैसर्स वेदप्रकाश एण्ड कंपनी को पांचों बिजली कंपनियों में 5 साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। ब्लैकलिस्ट होने के बाद भी फर्म फर्जीवाड़ा करने से बाज नहीं आई। फर्म की ओर से फर्जीवाड़ा कर जयपुर डिस्कॉम में करोड़ों रूपए के काम हासिल किए। अजमेर डिस्कॉम में भी फर्म की ओर से दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के करोड़ों रूपए के कार्य हासिल करने के लिए डिस्कॉम अधिकारियों की मिलीभगत फर्जी दस्तावेज लगाए। फर्म की ओर से टेंडर संख्या-44 में लगाए गए सभी वर्क कम्प्लीशन सर्टिफिकेट फर्जी थे। संबंधित कार्यालयों में जब आरटीआई से इन दस्तावेजों की जानकारी मांगी गई तो सभी कार्यालयों ने ऐसा कोई रिकार्ड या दस्तावेज होने से साफ मना कर दिया। फर्जी वर्क कम्प्लीशन सर्टिफिकेट का सारा खुलासा विभाग की ओर से आरटीआई में दिए गए इन दस्तावेजों से साफ हो रहा है।

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