Parashurama
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जयपुर। पिछले लम्बे समय से राजस्थान की मुख्य धारा की राजनीति में लगभग हाशिए पर डाल दिए गए ब्राहमण समुदाय की वापसी के संकेत मिल रहे है। यह संकेत दिए हैं अजमेर संसदीय सीट पर डॉ रघु शर्मा की जीत ने। माना जा रहा है कि अजमेर में कांग्रेस की ओर से खेला गया यह दांव गेम चेंजर साबित हो सकता है। क्योंकि कांग्रेस को लम्बे समय से राजस्थान में एक जिताऊ फार्मूले की तलाश थी और ब्राहमण, शेडयूल कास्ट व मुस्लिम के रूप में यह फार्मूला उसे यहां मिल गया।

प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही लम्बे समय से ब्राहमण समुदाय की उपेक्षा करते दिख रहे है। चुनाव में ब्राहमण समुदाय को मिलने वाले टिकटों में भी कमी आई और इसके बडे नेता भी दोनों ही दलों में हाशिए पर नजर आ रहे हैं। भाजपा में घनश्याम तिवाडी लम्बे समय से पार्टी में हाश्एि पर है। जब सरकार बनी तो पहली बार ऐसा हुआ कि एक भी ब्राहम्ण नेता केबिनेट में नहीं था। अरूण चतुर्वेदी पहले र ाज्य मंत्री बनाए गए, लेकिन ब्राह्मण समाज ने तत्काल तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसके चलते वसुंधरा राजे सरकार को अरुण चतुर्वेदी को केबिनेट मंत्री बनाना पड़ा। हालांकि पोर्टफोलियो काफी कमतर दिया, जो आज तक समाज को चुभ रहा है। संगठन और प्रशासनिक स्तर पर भी ब्राह्मण समाज की काफी उपेक्षा चल रही है। वहीं कांग्रेस में भी लम्बे समय से कोई ब्राहम्ण नेता किसी प्रमुख पद पर नहीं है और बी डी कल्ला, महेश जोशी जैसे प्रमुख नेता हाशिए पर चल रहे हैँ।

कांग्रेस ने इस उपचुनाव में अजमेर में 40 साल किसी ब्राहम्ण को लोकसभा का प्रत्याशी बनाया था। यह एक ऐसा तीर था जो सटीक निशाने पर लगा। बतााया जा रहा है कि उन्हें ब्राहम्ण समुदाय का पूरा समर्थन मिला और कांग्रेस भाजपा के परमानेंट वोट बैंक में सेंधमारी करने में कामयाब रही। माना जा रहा है कि यह सेंधमारी दोनों पार्टियों में असर दिखाएंगी। भाजपा एक बार फिर ब्राहम्णों की सुध लेगी और कांग्रेस गुजरात में अपनाए गए सॉफ्ट हिन्दुत्व के फार्मूले को यहां अब खुल कर अपनाएगी।

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