जयपुर। संसदीय कार्य मंत्री शांती कुमार धारीवाल ने मंगलवार को विधानसभा में गृह मंत्री की ओर से स्पष्ट किया कि पुलिस मुख्यालय द्वारा किसी भी कांनिस्टेबल की शिकायत प्राप्त होने पर उसकी निष्पक्ष जांच करने के बाद ही स्थानान्तरण की कार्रवाई की जाती है।
धारीवाल ने प्रश्नकाल में इस संबंध में पूछे गये पूरक प्रश्न के जवाब में बताया कि बगैर शिकायत के किसी भी कांनिस्टेबल का स्थानान्तरण नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा कि स्थानान्तरण तय प्रक्रिया के तहत किया जाता है। इसके अनुसार 15 वर्ष तक गृह जिले में लगातार काम करने पर तथा एक जिले से दूसरे जिले में पुरूष कांनिस्टेबल का 7 वर्ष में एवं महिला कांनिस्टेबल का 3 वर्ष में स्थानान्तरण किया जाता है, लेकिन इस दौरान उनकी एसीआर ठीक होनी चाहिए तथा कोई विभागीय जांच भी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि एक थाने में कांनिस्टेबल को लगातार 5 वर्ष तक रखा जा सकता है तथा 5 वर्ष पूर्ण होने पर यातायात शाखा में नियोजित किया जा सकता है। श्री धारीवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2021 में पुलिस मुख्यालय द्वारा एक जिले से दूसरे जिले में किये गये कांनिस्टेबलों के स्थानान्तरण में 191 स्क्रीनिंग कमेटी की अनुशंषा पर, 664 पदौन्नति पर , 221 प्रशासकीय आधार पर एवं 851 स्वयं के आवेदन के आधार पर किये गये है। इस प्रकार कुल 1336 कांनिस्टेबलों के स्थानान्तरण किये गये है।
इससे पहले विधायक रामनारायण मीणा के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में धारीवाल ने बताया कि पुलिस कांनिस्टेबल के एक से दूसरे जिले में स्थानान्तरण के परिपत्र जारी नही किये है, अपितु दिनांक 28-01-2015 को पुलिस कर्मियों के स्थानान्तरण या पदस्थापन हेतु नीति का अनुमोदन किया गया है। उन्होंने इसकी जानकारी सदन के पटल पर रखी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में पुलिस मुख्यालय द्वारा एक जिले से दूसरे जिले में पुलिस कांनिस्टेबल के स्थानान्तरण किये गये है। श्री धारीवाल ने इनका विवरण सदन के पटल पर रखा।
धारीवाल ने बताया कि भ्रष्टाचार के विरूद्ध जीरो टोलरेन्स नीति के तहत टोल फ्री नम्बर 1064, वाह्ट्सअप नम्बर 9413502834 पर अथवा प्राप्त शिकायतों पर कार्यवाही की जाती है। उन्होंने बताया कि कमजोर आर्थिक स्थिति के परिवादियाें द्वारा करवाये गये ट्रेप की कार्यवाही उपरान्त रिश्वत की राशि के पुनर्भरण हेतु भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरों में 1.00 करोड रूपये के रिवाल्विंग फण्ड की स्थापना की गई है। वर्ष 2019 में 114, वर्ष 2020 में 72 एवं वर्ष 2021 में 149 इस प्रकार कुल 335 पुलिस कार्मिकों के विरूद्ध 272 प्रकरण दर्ज किये गये है। उन्होंने इसका विवरण सदन के पटल पर रखा।

LEAVE A REPLY