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-जयपुर डिस्कॉम में अजीत सक्सेना और जोधपुर डिस्कॉम में प्रमोद टांक बने एमडी
– घोटालों व विवादों के चलते राज्य सरकार ने लगातार तीन साल से एमडी पद पर सुशोभित हो रहे विजय सिंह भाटी को राज्य सरकार ने चौथी बार नहीं दिया मौका।
– राकेश कुमार शर्मा
जयपुर। आखिर विजय सिंह भाटी को चौथी बार अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (अजमेर डिस्कॉम) के प्रबंध निदेशक (एमडी) पद पर एक्सटेंशन नहीं मिल पाया है। वे तीन साल से लगातार एमडी पद पर एक्सटेंशन लेते रहे। चौथी बार भी वे एमडी पद के लिए प्रयास में थे और इसके लिए खूब लॉबिंग भी कर रहे थे। वे निश्चिंत भी थे, लेकिन इस बार सरकार ने उन्हें मौका नहीं दिया। अजमेर डिस्कॉम एमडी पद पर वी.एस.निर्वाण को लगाया है। वहीं प्रमोद टांक को जोधपुर तथा अजीत सक्सेना को जयपुर विद्युत वितरण निगम का प्रबंध निदेशक बनाया है। एन.एस.निर्वाण वर्तमान में
राजस्थान राज्य अक्षय ऊर्जा निगम में निदेशक पद पर है। वे अजमेर डिस्कॉम से चीफ इंजीनियर पद से रिटायर्ड हुए और सरकार ने उन्हें अक्षय ऊर्जा निगम में निदेशक पद पर लगाया। तीनों डिस्कॉम में एमडी पद कुछ दिनों से खाली चल रहे थे। ब्यूरोक्रेटस और टेक्नोक्रेट्स में एमडी पद के लिए खासी लॉबिंग चल रही थी। मुख्यमंत्री से लेकर ऊर्जा मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं व मंत्रियों को साधा जा रहा था। तीनों डिस्कॉम के पूर्व एमडी तो फिर से एक्सटेंशन में लगे हुए थे, वहीं चीफ इंजीनियर और एडिशनल चीफ इंजीनियर भी एमडी पद के लिए खासी मशक्कत कर रहे थे। इस बार सरकार ने तीनों डिस्कॉम के पूर्व एमडी में से किसी भी अवसर नहीं दिया और ना ही किसी ब्यूरोक्रेट्स को एमडी पद पर लगाया।। इस बार तीनों डिस्कॉम में टेक्नोक्रेट्स लगाए हैं। सरकार को लगता है कि  बिजली संकट और घाटे से जूझ रही तीनों कंपनियों को टेक्नोक्रेट्स ही उभार सकते हैं। एक साल से कोयले की कमी से प्रदेश में छाए बिजली संकट से राजस्थान के करोड़ों उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ी। कुछ दिनों से कोयला संकट फिर से खड़ा हो गया है। ब्यूरोक्रेट्स कोयले संकट को संभाल नहीं पा रहे हैं, जिसके चलते सरकार की किरकिरी हो रही है और जनता को नाराजगी झेलनी पड़ रही है। यहीं कारण लगता है कि सरकार ने इस बार यूरोक्रेट्स को नजर अंदाज करके टेक्नोक्रेटस पर भरोसा जताया है।
–  छीजत रोक घाटे से उभारेंगे अजमेर डिस्कॉम को
अजमेर डिस्कॉम में नवनियुक्त एमडी एन.एस.निर्वाण ने कहा कि पहली प्राथमिकता अजमेर डिस्कॉम के अधीन जिलों में बिजली छीजत को रोकना है, ताकि कंपनी घाटे से उभर सके। राज्य सरकार की मंशा अनुरुप सभी उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति सुचारु मिल सके। केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाएं निष्पक्षता और ईमानदारी से पूरी करवाई जाएगी। जनता की शिकायतों पर त्वरित कार्यवाही करके समाधान करवाया जाएगा।

– जनप्रहरी एक्सप्रेस की खबरों ने दिखाया सच, तब नपे भाटी
दैनिक जनप्रहरी एक्सप्रेस ने प्रमुखता से श्रृंखलाबद्ध समाचार प्रकाशित करके अजमेर डिस्कॉम में लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार, नियम विरुद्ध कार्यों और फर्जीवाड़ों को प्रमुखता से उठाया। गौरतलब है कि अजमेर डिस्कॉम के पूर्व एमडी विजय सिंह भाटी के कार्यकाल के दौरान केन्द्र प्रवर्तित सौभाग्य योजना, सौर ऊर्जा योजना समेत अन्य योजनाओं के कार्यों में करोड़ों रुपयों के घपले, तय शर्तों के विपरीत ऊंची दरों पर ठेके देने, घटिया क्वालिटी के सामान लगाने जैसे मामले मीडिया की सुर्खियों में रहे। अजमेर डिस्कॉम के तत्कालीन एमडी विजय सिंह भाटी की सरपरस्ती में फर्जीवाड़े के बारे में सरकार और शासन को अवगत कराया गया। जनप्रहरी एक्सप्रेस ने दूध की रखवाली बिल्ली के जिम्मे, चहेती फर्म को फायदा देने के लिए अफसरों ने अधिक दरों पर खरीद की, अजमेर डिस्कॉम के एमडी विजय सिंह भाटी के परिवार की कंपनी के पार्टनर ही ले रहे हैं अरबों रुपयों का ठेका, दुस्साहस कहे या कुछ और… आदेश थे 55 मेगावाट के, टेण्डर निकाल दिए 200 मेगावाट के, सोलर प्लांट के ठेके अलग-अलग कंपनियों को फिर इंस्पेक्शन एक ही जगह क्यों?, वे कह रहे हैं टॉप फाइव में है अजमेर डिस्कॉम, भारत सरकार बता रही है सी ग्रेड कंपनी, आखिर बिल्ली से छीनी दूध की रखवाली, अजमेर डिस्कॉम की जांच में भी सामने आई अनियमितता, कंपनियों पर लगाया भारी जुर्माना, जब कंपनियों पर भारी जुर्माना तो निरीक्षण करने वाले अभियंताओं को क्यों छोड़ा आदि शीर्षक से लगातार श्रृंखलाबद्ध समाचार प्रकाशित करके अजमेर डिस्कॉम प्रबंधन के भ्रष्टाचार को उजागर किया गया। राज्य सरकार और अजमेर डिस्कॉम की जांच कमेटियों ने भी माना कि टेंडरों में भारी घपलेबाजी हुई और सरकारी कोष को करोड़ों रुपयों की चपत लगी। दोषी कंपनियों पर करोड़ों रुपयों का हर्जाना लगाया। अभियंताओं को चार्जशीट दी गई। राजस्थान सरकार के साथ भारत सरकार के केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने भी जनप्रहरी एक्सप्रेस के उक्त समाचारों पर प्रसंज्ञान लेते हुए दस हजार करोड़ रुपयों के टेण्डरों को निरस्त किया। उक्त घोटालों और विवादों को देखते हुए राज्य सरकार ने विजय सिंह भाटी को चौथी बार एक्सटेंशन नहीं दिया।

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