Time capsule
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जालंधर. आज की प्रौद्योगिकी की 100 वर्ष की झांकी को अगली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने हेतु टाईम कैप्सूल को जमीन में गाड़ा गया लवली प्रोफेशनल यूनीवर्सिटी, जालंधर में आयोजित 106वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस में इजरायल के नोबल पुरस्कार से सम्मानित एवराम हेर्शको और अमेरिका के एफ. डंकन एम. हॉल्डाने द्वारा आज वर्तमान प्रौद्योगिकी और भारत के वैज्ञानिक कौशल का प्रतिनिधित्व करने वाले मदों के साथ एक टाईम कैप्सूल को जमीन में गाड़ा गया।

इस टाईम कैप्सूल में 100 ऐसे मदों को शामिल किया गया है, जो भारत में अनुभव की जाने वाली आधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रतिनिधित्व करते हैं। भारत के वैज्ञानिक कौशल का प्रतिनिधित्व करने वाले मंगलयान, ब्रह्मोस मिसाइल और तेजस लड़ाकू जेट की प्रतिकृतियों के अलावा, इस कैप्सूल में लैपटॉप, लेंडलाईन फोन, स्मार्ट फोन, ड्रोन, वीआर ग्लास, स्टॉपवाच, अमेजन अलैक्सा आदि शामिल हैं। इसमें एयरफिल्टर, इंडक्शन कूकटॉप, एयर फ्रायर आदि जैसी उपभोक्ता सामग्रियां भी शामिल हैं, जो हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा हैं। संरक्षित किए गए कुछ अन्य उत्पादों में सोलर पैनल, नवीनतम डॉक्यूमेंट्रियों और फिल्मों सहित हार्डडिस्क, 12वीं कक्षा के छात्रों के अध्यापन में इस्तेमाल होने वाली मौजूदा विज्ञान की पुस्तकों तथा एक दर्पण रहित कैमरा शामिल हैं।

लवली प्रोफेशनल यूनीवर्सिटी के विभिन्न विभागों के छात्रों द्वारा तैयार किए गए कैप्सूल को दस फुट नीचे जमीन में गाड़ा गया, जो अगले 100 वर्षों के लिए गड़ा रहेगा। वहां एक पट्टिका भी लगाई गई है, जिसमें यह लिखा गया है कि इस टाईम कैप्सूल को 3 जनवरी, 2119 को खोला जाएगा।
प्रत्येक वर्ष नई प्रौद्योगकीय क्षमताएं प्राप्त हो रही हैं। इस टाईम कैप्सूल को प्रौद्योगिकी के बारे में जानकारी का प्रतिनिधित्व करने के लिए विकसित किया गया है, क्योंकि आज यह अस्तित्व में है तथा भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक अवसर उपलब्ध कराएगा और 100 साल के बाद आज की प्रौद्योगिकी की झांकी दिखाएगा।

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