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जयपुर। समय पर विवरणियां पेश करने के बाद भी एसेसमेंट नहीं करने, नई खरीदी गई मशीनोंं के लिए सी-फार्म नहीं देने तथा स्टॉक वेरीफिकेशन करने की एवज में 16 मार्च, 2००7 को 71०० रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किए गए वाणिज्यकर विभाग केे सहायक आयुक्त के ऑफिस में तत्कालीन कनिष्ठ लिपिक पुनीत कुमार जैन को एसीबी मामलों की स्पेशल कोर्ट-एक में जज बलजीत सिंह ने दो साल की जेल एवं 2० हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।

इस संबंध में शिव कॉलोनी-हटवाड़ा रोड निवासी योगेन्द्र लोकण्डा ने एसीबी में शिकायत दर्ज करवाई थी कि वह नवल मोटर्स में साझेदार है तथा कम्पनी टीवीएस कम्पनी के वाहनों की सर्विस एवं सेल का व्यवसाय करती है। परिवादी ने छोटे बाबू पुनीत पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। एसीबी ने 16 मार्च, 2००7 को ऑफिस में ही 71०० रुपए की रिश्वत लेते हुए पुनीत को रंगे हाथ गिरफ्तार कर 24 मई, 2००8 को चालान पेश किया था। पुनीत के खिलाफ तत्कालीन वाणित्यक कर आयुक्त मुकेश शर्मा ने 24 अप्रेल, 2००8 को अभियोजन स्वीकृति जारी की थी।

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