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लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार का बड़ा फैसला
जयपुर। लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार ने बड़ा दांव खेलते हुए सवर्ण समाज को बड़ा तोहफा दिया है। मोदी सरकार ने सवर्ण समाज को दस फीसदी आरक्षण देने का केबिनेट फैसला किया है। साथ ही शीतकालीन सत्र में इस बिल को पेश करेगी। दस फीसदी आरक्षण के लिए संविधान में संशोधन करने का भी ऐलान किया है। मोदी सरकार के इस फैसले को दूरगामी बताया जा रहा है।

इस फैसले को सवर्ण समाज के नाराज मतदाताओं को भी लुभाने वाला बताया जा रहा है। जीएसटी, नोटबंदी के बाद एसटी-एससी एक्ट के संशोधन विधेयक के बाद से सवर्ण समाज किसी ना किसी तरह से मोदी सरकार से नाराज है। इस नाराजगी का खामियाजा राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि भाजपा शासित राज्यों में देखने को मिला है, जहां सवर्ण समाज ने नाराजगी जाहिर करते हुए बीजेपी को वोट देने में वो उत्साह नहीं दिखाया, जो वर्ष २०१४ में भाजपा को वोट देते वक्त दिखाया था। सवर्ण समाज को आरक्षण देने को लेकर हिन्दी भाषी राज्यों में बड़े आंदोलन भी हुए और अभी भी सवर्ण समाज आंदोलन की राह पर है।

ऐसे में आगामी लोकसभा चुनाव में सवर्ण समाज की नाराजगी भारी ना पड़ जाए, इसे देखते हुए काफी समय से सवर्ण समाज के हितों के लिए पार्टी व सरकार में बड़ा गहन चिंतन चल रहा था। शीतकालीन सत्र के दौरान अचानक सवर्ण समाज को दस फीसदी आरक्षण के केबिनेट फैसले, संविधान में संशोधन करने के कदम से हर कोई अचंभित हो गया। इस बिल को इसी सत्र में पेश करके पारित करवाया जाएगा। आर्थिक आधार पर दस फीसदी आरक्षण बिल को लेकर दूसरे दलों ने भी समर्थन देना शुरु कर दिया है। एकाध दलों को छोड़कर सभी राजनीतिक दलों से समर्थन मिलने की संभावना है।

– ये किए है प्रावधान
मोदी सरकार ने सवर्णों को दस फीसदी आरक्षण आर्थिक आधार पर देना का फैसला किया है। यह आरक्षण सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए आर्थिक आधार पर होगा। जिनकी आमदनी आठ लाख रुपए से कम है और जिनके पास पांच एकड़ भूमि है, उन्हें फायदा मिलेगा। मंगलवार को ही संविधान संशोधन विधेयक पारित करवाया जाएगा।

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