जयपुर. प्रदेश के सबसे बड़े हॉस्पिटल सवाई मानसिंह (एसएमएस) में मरीजों को मनमानी दवाईयां लिखकर खुद का कमिशन उठाने वाले डॉक्टरों की अब खैर नहीं। ऐसे डॉक्टरों पर लगाम कसने के लिए एसएमएस हॉस्पिटल प्रशासन ने अहम निर्णय किया है। इसके तहत अब डॉक्टरों को सख्त निर्देश दिए है कि वे सरकार की ओर से बनाई एसेंशियल ड्रग लिस्ट (ईडीएल) में से ही मरीजों को दवाईयां लिखे। अगर इस सूची से बाहर की दवाईयां कोई डॉक्टर बार-बार मरीजों को लिखता है तो प्रशासन उस दवाई की खरीद-प्रक्रिया में उसी डॉक्टर को शामिल करेगा। ताकि ये रिपोर्ट तैयार हो सके कि ये दवाई यहां आने वाले मरीजों के लिए जरूरी है और इसे ईडीएल लिस्ट में शामिल किया जा सके। दर असर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने पिछले कार्यकाल में प्रदेश के हर वर्ग को फ्री दवाईयां, जांच की सुविधा देने के लिए साल 2012 में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा एवं जांच योजना की शुरूआत की थी। जब इसकी शुरूआत हुई थी तब एडीएल की सूची सीनियर डॉक्टर्स की सिफारिश पर तैयार करवाई थी। उस समय इस लिस्ट में केवल 711 दवाईयां (साल्ट) ही शामिल थे। साल 2018 में दोबारा सरकार आने पर गहलोत सरकार ने सभी को पूरी तरह फ्री इलाज देने का वादा किया और उसके तहत न केवल मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना और दवाई योजना का दायरा बढ़ाया, बल्कि सरकारी हॉस्पिटल में तमाम ओपीडी-आईपीडी चार्ज को खत्म कर दिया। ताकि मरीज जब सरकारी हॉस्पिटल में एंट्री करें तो उसे दवाईयां, जांच, ऑपरेशन से लेकर किसी तरह की पर्ची बनवाने का एक भी पैसा न देना पड़े। इसी के तहत सरकार ने मरीजों की सुविधा के लिए फ्री दवाईयाें जो 711 थी वह अब बढ़ाकर अब 1600 के करीब कर दी। ईडीएल लिस्ट में शामिल की इन सभी दवाईयां को भी एसएमएस के ही सीनियर डॉक्टर्स की सिफारिश और परामर्श के बाद शामिल किया। लेकिन इसके बावजूद अब भी कई डॉक्टर अब भी किसी न किसी बहाने और तर्क बताकर इस सूची से बाहर की दवाईयां मरीजों को लिख रहे है। ऐसी दवाईयों को एसएमएस प्रशासन अपनी तरफ से लोकल परचेज (स्थानीय खरीद) करके दवाईयां उपलब्ध करवाना पड़ रहा है। इस प्रक्रिया में फाइनेंशियल और एडमिनिस्ट्रेटिव दिक्कते आ रही है। इस कारण न केवल मरीजों को परेशानी हो रही है, बल्कि प्रशासन का काम भी प्रभावित हो रहा है। कैंसर, स्कीन, आई और सुपर स्पेशलिटी के विभागों से इस तरह की ज्यादा शिकायतें आ रही है। यहां के डॉक्टर्स कई दवाईयां ऐसी लिख रहे है, जो हॉस्पिटल में मिल ही नहीं रही। इसके लिए मरीज को दवाईयां ताे बाहर से खरीद करनी पड़ रही है या हॉस्पिटल प्रशासन खुद के स्तर पर खरीद करके लाइफ लाइन से उपलब्ध करवा रहा है। एसएमएस हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. अचल शर्मा ने बताया कि हमने सभी विभागों के एचओडी को निर्देश दिए है कि वे सरकार की तरफ से ईडीएल लिस्ट में से ही मरीजों को दवाईयां लिखे। अगर किसी डॉक्टर को इस लिस्ट से बाहर की कोई दूसरी दवाई लिखनी जरूरी है तो उन्हें एक-दो मामले में शिथिलता दी जाएगी। लेकिन सतत प्रक्रिया के तहत दवाई लिखी जाती है तो डॉक्टर की ये जिम्मेदारी होगी कि वह इस मामले पर प्रशासन से चर्चा कर उस दवाई को एसेंशियल ड्रग लिस्ट में शामिल करवाए।

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