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जयपुर। सिडीकेट बैंक घोटाले में से जुड़े संदिग्ध व्यापारियों पर अब प्रवर्तन निदेशालय (एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट) की भी निगाह है। बैंक में घोटाले की राशि से हुए लेनदेन में कुछ जयपुर, इंदौर, कोलकाता के कुछ संदिग्ध व्यापारियों के लेनदेन की जानकारी मिली है। सूत्रों के अनुसार उन व्यापारियों के बारे में ईड़ी जानकारी जुटा रहा है। तथ्य और सबूत मिलने के बाद इनसे पूछताछ की जा सकती है। ये व्यापारी सीबीआई के निशाने पर भी है। करीब एक हजार करोड़ घोटाले की रकम कहां-कहां खपाई गई है और इससे कितनी संपत्ति बनाई गई है। इसकी भी जानकारी ईडी जुटा रहा है। तथ्य और सबूत मिलने के बाद ईडी इन व्यापारियों की संपत्ति सीज करने की कार्रवाई कर सकता है। कालवाड़ रोड पर एक बड़े डवलपर और बिल्डर का नाम इसमें आ रहा है। इसके साथ ही भाजपा से जुड़ा एक पूर्व पार्षद भी इसमें शामिल है। साथ ही रियल स्टेट, शेयर ब्रोकर, व अन्य धंधों से जुड़े व्यापारी भी घोटाले की रकम को खपाने में शामिल है। सिंडीकेट बैंक के 386 खातों में अधिकतर खाते फ्रीज हो चुके हैं। इन खातों के जरिए शंकर खंडेलवाल, भरत बम्ब की कंपनियों में पैसा निकाला गया। एक पूर्व पार्षद पर भी सीबीआई की निगाह है क्योंकि इस पार्षद के खातों में फर्जी खातों से लेनदेन हुआ है। जयपुर, इंदौर, कोलकाता, बैंगलोर और मुंबई के व्यापारियों के खातों में पैसा गया है। यह पैसा शेयर बाजार, व्यापार, रियल स्टेट में निवेश किया गया है। इन व्यापारियों पर अब सीबीआई की जांच की अगली कड़ी में दूसरे शहरों के व्यापारियों से भी पूछताछ की जाएगी। इस पैसे को जहां भी निवेश किया गया है उन संपत्तियों को ईडी जब्त कर सकता है। ईडी शंकर खंडेलवाल और भरत बम्ब की पार्थ सिटी और उससे जुड़ी संपत्तियों को जब्त कर चुका है। बैंक घोटाले मेंं सीबीआई कोर्ट में इस समय आरोपियों पर चार्ज बहस चल रही है। आरोपी भरत बम्ब फिलहाल जमानत पर है और शंकर खंडेलवाल, उसका भाई टीकम खंडेलवाल फर्जी पट्?टा देने के आरोप में जेल में हैं।

बेनामी संपत्ति भी खरीदी
घोटाले की प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि इन संदिग्ध व्यापारियों ने घोटाले की रकम से बेनामी संपत्ति भी खरीदी है। इस संपत्तियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। यह संपत्ति कहां-कहां खरीदी गई है और किसके नाम से खरीदी गई है। इसकी जानकारी ईडी जुटा रहा है।

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