जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोरोना की दूसरी लहर में लॉकडाउन अवधि (25 अप्रेल, 2021 से 01 जून, 2021) से पहले छुट्टी पर जाने वाले, अनुमति लेकर मुख्यालय छोड़ने वाले, यातायात के साधनों की अनुपलब्धता तथा आवाजाही पर प्रतिबंध के कारण कार्यालय में उपस्थित नहीं हो पाने वाले कार्मिकों की अनुपस्थिति अवधि को नियमित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस सम्बन्ध में कर्मचारी संघों ने राज्य सरकार को ज्ञापन प्रस्तुत किए थे।
प्रस्ताव के अनुसार, ऎसे कार्मिक जो राजकीय यात्रा पर गए थे और राजकीय परिवहन की अनुपलब्धता के कारण मुख्यालय नहीं पहुंच सके, उनका राजकीय यात्रा के समापन पर पदभार ग्रहण माना जाएगा। इसी प्रकार, वे कार्मिक जो लॉकडाउन लगने के 25 अप्रेल, 2021 के आदेश  से पहले अवकाश पर थे और उनका अवकाश लॉकडाउन अवधि के दौरान खत्म हुआ है तो अवकाश समाप्ति की दिनांक से उनका पदभार ग्रहण माना जा सकेगा। मेडिकल अवकाश की स्थिति में मेडिकल एवं फिटनेस प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा। वे कार्मिक जो अनुमति प्राप्त कर सप्ताह अंत 25 अप्रेल, 2021 रविवार को मुख्यालय छोड़कर गए, लेकिन राजकीय परिवहन की अनुपलब्धता के कारण 26 अप्रेल, 2021 को उपस्थित नहीं हो सके, उनका 26 अप्रेल से ही पदभार ग्रहण माना जाएगा। इन सभी प्रकरणों में यह आवश्यक होगा कि कार्मिक ने राजकीय परिवहन या हवाई साधनों की अनुपलब्धता के सम्बन्ध में किसी भी रूप में कार्यालय को सूचना दी हो।
इसके अतिरिक्त ऎसे कार्मिक जो लॉकडाउन के आदेश से पूर्व अवकाश पर थे, लेकिन स्वीकृत अवकाश अवधि का संक्षिप्तिकरण करते हुए अवकाश समाप्ति से पहले ही ज्वाइन करने के इच्छुक थे, उनका पदभार ग्रहण अवकाश समाप्ति के अगले दिन से माना जाएगा। अवकाश संक्षिप्तिकरण तब ही स्वीकृत माना जाएगा, जब स्वीकृतकर्ता अधिकारी ने कार्यालय में उत्पन्न आकस्मिक परिस्थितियों के दृष्टिगत ऎसी अनुमति प्रदान की हो।

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