– मुख्य सचिव ने समीक्षा की 31.4 करोड़ के ग्रीन एग्रीकल्चर प्रोजेक्ट की
जयपुर। मुख्य सचिव ऊषा शर्मा ने सोमवार को अपने कक्ष में बाड़मेर और जैसलमेर जिलो में बनने वाले ’’डेजर्ट नेशनल पार्क’’ में जैव विविधता और वन परिदृश्यों के संरक्षण के लिए शुरू किये गये ग्रीन एग्रीकल्चर प्रोजेक्ट की तैयार कार्य योजना के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। ऊषा शर्मा ने दोनों जिला कलेक्टर्स को आपसी समन्वय से कार्य करते हुए इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता से लेने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय मरू उद्यान इलाकों के लिए यह प्रोजेक्ट बहुत महत्वपूर्ण है और इसके सफल क्रियान्वयन के लिए क्षेत्र में सर्वे कर कम्यूनिटी से संवाद करें और उसी के अनुसार वहां कि जाने वाली गतिविधियों का चयन किया जाए। बैठक में कृषि विभाग के प्रमुख शासन सचिव दिनेश कुमार ने बताया कि जैसलमेर एवं बाड़मेर जिलों की 52 ग्राम पंचायतों के 10 हजार 400 कृषक परिवारों के लिए स्थानीय खरीद को सुगम बनाने के साथ स्थानीय उपज की खरीद और उनका बाजार से जुड़ाव के प्रयास किये जायेंगे। इस प्रोजेक्ट के तहत किसान पाठशालाओं के आयोजन से ग्राम वासियों के जीवन स्तर को उठाया जाएगा साथ ही 6 हजार परिवारों के पोषण में वृद्धि के लिए उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा। 200 प्राणी मित्रों, पशु सखियों को किसानों की सहायता के लिए प्रशिक्षित होंगे। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट के तहत हरित परिदृश्य परियोजना द्वारा से सम्बन्धित गांवो के 50 परिवारों को कृमि मुक्ति और पशुओं के टीकाकरण से लाभान्वित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट के तहत हरित परिदृश्य परियोजना सम्बन्धित गांवो के 50 परिवारों को कृमि मुक्ति और पशुओं के टीकाकरण से लाभान्वित किया जाएगा। ’’फामर्स फील्ड स्कूलों के माध्यम से जैव विविधता और स्थानीय संरक्षण के प्रयास किये जाऎंगे। बैठक में कृषि आयुक्त कानाराम ने कहा कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य जैव विविधता और वन परिदृश्य का संरक्षण करना है। उन्होंने बताया कि 31.4 करोड़ के इस प्रोजेक्ट की वर्ष 2026 तक पूरे होने की सम्भावना है। प्रोजेक्ट के तहत आने वाले गांवो में पारम्परिक प्राकृति स्त्रोतों जैसे गोचर, ओरण एवं टांका आदि को पुनर्जिवित किया जाएगा। गांवो में विलायती बबूलों को हटा कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के प्रयास किये जाएंगे। बैठक में जैसलमेर और बाड़मेर के जिला कलेक्टर एवं कृषि खाद्य संगठन के अधिकारी वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े।

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