जयपुर। पांच दिन पहले जयपुर के हवामहल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस का टिकट गंवाने के बाद पूर्व शिक्षा मंत्री बृजकिशोर शर्मा के परिवार की बेलगाम बयानबाजी नित नये विवाद खड़े कर रही है। अपने पिता बृजकिशोर का टिकट कटने के बाद उनके पुत्र आशुतोष शर्मा ने कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन करते हुए मीडिया के जरिए कांग्रेस पार्टी को चेतावनी दी थी कि कांग्रेस को पूरे प्रदेश के ब्राह्मणों को जवाब देना पड़ेगा। उनके इस बयान की कांग्रेस पार्टी में कड़ी निंदा हुई थी और यह माना गया था कि वे ब्राह्मण वोटरों को कांग्रेस के खिलाफ भड़का रहे हैं।

हालांकि कांग्रेस ने हवामहल से ब्राह्मण की जगह ब्राह्मण को ही टिकट दिया है। वहाँ से जयपुर के पूर्व सांसद महेश जोशी कांग्रेस प्रत्याशी बने हैं। यहाँ से एक प्रखर युवा ब्राह्मण नेता सुनील शर्मा भी टिकट के प्रबल दावेदार थे और टिकट का मुख्य मुकाबला महेश जोशी और सुनील शर्मा में ही रहा था। टिकट की दौड़ में बृजकिशोर शर्मा तो शुरू से हाशिए पर चल रहे थे।

इस जमीनी हकीकत को दरकिनार करते हुए आशुतोष शर्मा का मीडिया में दिया एक और बयान सामने आया है। इसमें आशुतोष शर्मा कहते हैं कि ‘ कांग्रेस को सत्तर साल का हिसाब देना पड़ेगा। ‘ उनके इस बयान की तीव्र प्रतिक्रिया हो रही है।

गौरतलब है कि बृजकिशोर शर्मा के पिता पं. नवलकिशोर शर्मा वर्ष 1967 के उपचुनाव में दौसा संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे । जनमानस में नवलकिशोर शर्मा ने अपना आदर व सम्मान अत्यंत परिश्रम व समर्पण से बनाया था । वे जयपुर से कांग्रेस सांसद भी बने और प्रदेश की कांग्रेस पार्टी एवं ब्राह्मण राजनीति की धुरी भी रहे । उनका लोकतांत्रिक मूल्यों में जहाँ गहरा विश्वास था, वहीं गांधीवादी मूल्यों में भी दृढ़ आस्था थी । इसलिए वे राज्यपाल, केन्द्रीय मंत्री, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचे और कांग्रेस पार्टी के पुरोधाओं में उन्हें गिना जाता है । हालांकि एक दौर में उनके राजीव गांधी जैसे ओजस्वी राजनेता से गहरे मतभेद भी रहे और ऐसी चर्चाएं भी आयी कि नवलकिशोर शर्मा संभवतः कांग्रेस ही छोड़ दें । लेकिन नवलजी बहुत सुलझे हुए राजनेता थे, वे कांग्रेस में ही रहे और राजीव गांधी के बलिदान के बाद कांग्रेस पार्टी के कई बार संकटमोचक भी बने । वर्ष 1998 में नवलजी प्रदेश के मुख्यमंत्री नहीं बन सके हालांकि वे प्रबल दावेदार थे लेकिन उन्होंने कभी अपना संयम नहीं खोया ।

लेकिन इसके विपरीत पांच दिन पहले उनके 48 वर्षीय पौत्र आशुतोष शर्मा ने जिस तरह अपना संयम प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय के बाहर खोया और कांग्रेस से सत्तर साल का हिसाब तक मांग लिया । उसके बाद यह प्रश्न भी खड़ा हो रहा है कि नवलकिशोर शर्मा का प्रदेश की राजनीति में सफरनामा 70 वर्ष का नहीं होकर मात्र 45 वर्ष का था । नवलजी की राजनीतिक विरासत उनके पुत्र बृजकिशोर शर्मा ने जरूर संभाली लेकिन वे कभी प्रदेशस्तरीय नेता नहीं बन सके । वे कैबीनेट मंत्री बनकर भी अपने विधानसभा क्षेत्र हवामहल तक ही सीमित रह गये और वहाँ भी उनकी बेरूखी से लोगों की नाराजगी बढ़ती गई । बृजकिशोर शर्मा अपना वर्ष 2008 का चुनाव भी खुद की वजह से नहीं बल्कि बुजुर्ग नवलजी के प्रयासों से बहुत मुश्किल से जीते थे । नवलजी के निधन के बाद वे अपने पिता की राजनीतिक विरासत को संभालने में नितांत असफल रहे ।

जिस तरह नवलजी के पौत्र आशुतोष शर्मा ने कांग्रेस पार्टी से सत्तर साल का हिसाब मांगा है । उसके बाद आशुतोष शर्मा से कांग्रेस के एक कार्यकर्ता हाजी जमशेद खान ने तो यहाँ तक पूछा है कि क्या वे कांग्रेस में सक्रिय भी हैं । क्योंकि आशुतोष शर्मा सिर्फ़ अपना कारोबार संभालते हैं और कांग्रेस में उनकी कोई सक्रिय भूमिका कभी सामने नहीं आयी है ।

इसके साथ ही कांग्रेस के इतिहास के पन्ने भी अब पलटे जाने लगे हैं । आजादी के बाद राजस्थान को कांग्रेस पार्टी के झंडे तले पं. हीरालाल शास्त्री, पं. जयनारायण व्यास, पं. टीकाराम पालीवाल जैसे ओजस्वी व युग पुरूष ब्राह्मण मुख्यमंत्रियों का नेतृत्व मिला । उस दौर में गोकुल भाई भट्ट, पं. अभिन्न हरि, हरिभाऊ उपाध्याय, रामकरण जोशी, दामोदर दास व्यास, रामकिशोर व्यास जैसे अनेक ब्राह्मण पुरोधा कांग्रेस विचारधारा के प्रकाश पुंज बने । इसके उपरांत हरिदेव जोशी ने प्रदेश की राजनीति व ब्राह्मण नेतृत्व को एक नई दिशा और शक्ति दी । आज इन पुरोधा कांग्रेस नेताओं के परिजन राजनीति में या तो नहीं हैं और जो हैं वे शालीनता की मिसाल हैं । लेकिन जिस तरह आशुतोष शर्मा ने कांग्रेस से सत्तर साल का हिसाब मांगा है, उससे सवाल खड़ा हो गया है कि क्या प्रदेश की कांग्रेस राजनीति में ब्राह्मण नेतृत्व किसी एक परिवार की बपौती तक सीमित है । क्या बृजकिशोर शर्मा का टिकट कटने मात्र से प्रदेश में ब्राह्मण नेतृत्व और कांग्रेस पार्टी के रिश्ते दांव पर लग गये हैं । जबकि कांग्रेस ने इन विधानसभा चुनाव में प्रखर ब्राह्मण नेता डॉ. रघु शर्मा को तो अपना प्रचार अभियान समिति का प्रमुख बनाया है। वहीं डॉ. गिरिजा व्यास, डॉ. सीपी जोशी, डॉ. बीडी कल्ला, डॉ. महेश जोशी, राजेन्द्र पारीक, हरिमोहन शर्मा, पं. भंवरलाल शर्मा, कैलाश त्रिवेदी जैसे दिग्गज ब्राह्मण नेताओं को टिकट दिया है । साथ ही डॉ. रघु शर्मा भी चुनाव मैदान में हैं । नये ब्राह्मण चेहरों में राकेश पारीक, प्रशांत सहदेव शर्मा, भंवरलाल पुजारी, महेश व्यास, पुष्पेन्द्र भारद्वाज, राखी गौतम, सुनील शर्मा, हिमांशु शर्मा कटारा जैसे युवा चुनाव मैदान में हैं । मालवीय नगर से तो दो युवा ब्राह्मण महिला नेत्रियों डॉ. अर्चना शर्मा और सोनाक्षी वशिष्ठ में गहरी कशमकश के बाद अनुभव के आधार पर डॉ. अर्चना शर्मा को टिकट दिया गया । एक युवा ब्राह्मण व कुशल संगठक महेश शर्मा जहाँ पीसीसी के संगठन महासचिव हैं, वहीं कांग्रेस की इस समय चुनावी रणनीति की धुरी डॉ. विभूतिभूषण शर्मा एडवोकेट, सुशील शर्मा एडवोकेट, पं.सुरेश मिश्रा, कृष्ण कुमार हरितवाल जैसे युवा ब्राह्मण नेता भी हैं ।

लेकिन जिस तरह आशुतोष शर्मा ने खुलेआम कांग्रेस पार्टी के खिलाफ जहर उगला है और कांग्रेस पार्टी से हिसाब मांगा है । उससे चर्चा गर्म है कि विधानसभा चुनाव के बाद यह मामला कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी तक पहुंचाया जाएगा । हालांकि इतना तय है कि आशुतोष शर्मा के गैर जिम्मेदारी युक्त रवैये ने कांग्रेस पार्टी में उनके परिवार के पुनर्वास के सभी रास्ते बंद कर दिए हैं और अपने पिता बृजकिशोर शर्मा का राजनीतिक वनवास सुनिश्चित कर दिया है । कांग्रेस में यह भी कहावत चल पड़ी है कि ‘ ड्रांईग रूम में बैठकर कांग्रेस को अपनी बपौती समझना ही एक बड़ी सियासी गलती इनसे साबित हुई। इसलिए इनका विरोध भी तिनके की तरह हवा में उड़ अपना वजूद नहीं दिखा पाया । ‘ जो भी हो, एक कद्दावर पुरोधा राजनेता की विरासत यूं मिटाने के लिए उनके वारिस जरूर याद किये जाएंगे ।

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