जयपुर। राजस्थान फोन टैपिंग मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विशेषाधिकारी और प्रदेश कांग्रेस सेंट्रल वॉर रूम के को-चेयरमैन लोकेश शर्मा मंगलवार को रोहिणी स्थित क्राइम ब्रांच में पूछताछ के लिए पेश हुए। इस दौरान क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने लोकेश शर्मा से चार घंटे तक कड़ी पूछताछ की। इस दौरान क्राइम ब्रांच ने लोकेश शर्मा से फोन टैपिंग से जुड़े सवाल पूछे। सूत्रों के अनुसार लोकेश शर्मा ने क्राइम ब्रांच के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि राजस्थान में सरकार गिराने की साजिश हुई थी। पैसों के लेन-देन सहित दूसरे तथ्य सोशल मीडिया के जरिए उनके पास आए थे। फोन टैपिंग से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है। इस मामले में लोकेश शर्मा को दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 9 अक्टूबर को 8वीं बार पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था। लोकेश शर्मा अभी तक 5 बार पूछताछ के लिए व्यक्तिगत तौर पर पेश हो चुके हैं और 3 बार लोकेश शर्मा की ओर से लिखित जवाब पेश किया जा चुका है। अब उन्हें 11 अक्टूबर को भी पूछताछ के लिए 9वां नोटिस जाकर हाजिर होने के लिए कहा गया है। वहीं 11 अक्टूबर को ही इसी मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में भी सुनवाई होनी है। चार घंटे की कड़ी पूछताछ के बाद दिल्ली क्राइम ब्रांच दफ्तर से बाहर निकलते समय लोकेश शर्मा मीडिया से रूबरू हुए। इस दौरान लोकेश शर्मा ने कहा कि हर बार पूछताछ में क्राइम ब्रांच के अफसरों की तरफ से एक ही तरह के सवाल किए जा रहे हैं और उन्होंने हर बार ये स्पष्ट किया है कि उनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है। जो ऑडियो क्लिप उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से मिलीं। उन्होंने सर्कुलेट करने का काम किया। क्योंकि उन ऑडियो क्लिप में हो रही बातचीत में राजस्थान की चुनी हुई सरकार को गिराने की साजिश रची जा रही थी और ऐसी साजिश जिसमें लोकतंत्र में पैसों के लेन-देन के जरिए सरकार को गिराने की बात की जा रही हो तो उन्होंने उचित समझा कि मीडिया के माध्यम से उन्हें जनता तक पहुंचाया जाए और यही उन्होंने किया। लोकेश शर्मा ने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा कि ऑडियो क्लिप सामने आने के 9 महीने बाद केंद्रीय मंत्री को इस बात का अहसास हुआ कि इनके जरिए उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है और इसलिए उन्होंने इसे लेकर एक मामला दर्ज करवाया। लोकेश शर्मा ने जोर देते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री की ओर से दर्ज करवाई गई। एफआईआर में बड़े ही स्पष्ट रूप से ये लिखा हुआ है कि केंद्रीय मंत्री की टेलीफोनिक वार्तालाप को गैर-कानूनी तरीके से इंटरसेप्ट करके सर्कुलेट किया गया। जबकि उनका यह कहना है कि उन्हें कोई टेलीफोनिक वार्तालाप को इंटरसेप्ट नहीं किया। दूसरी तरफ अगर केंद्रीय मंत्री की ओर से करवाई गई एफआईआर को आधार माना जाए तो केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ये स्वीकार कर रहे हैं कि उस वार्तालाप में उन्हीं की आवाज है। इसीलिए उन्होंने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। लोकेश शर्मा ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि 11 अक्टूबर को इस मामले में दिल्ली कोर्ट में सुनवाई होनी है उसके बावजूद एक दिन पहले उन्हें क्राइम ब्रांच में पेश होने के लिए कहा गया। गौरतलब है कि राजस्थान सरकार पर साल 2020 में आए सियासी संकट के समय सरकार को गिराने की साजिश से जुड़े सोशल मीडिया से मिले कुछ ऑडियो क्लिप को मीडिया के जरिए सार्वजनिक कर लोकेश शर्मा ने राजस्थान सरकार को अस्थिर होने से बचाने में अपनी भूमिका निभाई थी। वहीं इन्हीं ऑडियो क्लिप को लेकर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मार्च, 2021 में लोकेश शर्मा के खिलाफ दिल्ली क्राइम ब्रांच में अवैध रूप से फोन टैपिंग करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करवाया था। वहीं दिल्ली में मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने फिर से लोकेश शर्मा का बचाव किया। मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि फोन टैपिंग मामले में बिना वजह लोकेश शर्मा को परेशान किया जा रहा है, लोकेश शर्मा का का क्या कसूर है ? उन्होंने कहा कि सरकार गिराने के षड्यंत्र में केंद्रीय मंत्री शामिल हैं, रिकॉर्डिंग में वॉइस उन्हीं की है और आप लोकेश शर्मा को तंग कर रहे हो अनावश्यक रूप से, आप खुद षड्यंत्र में शामिल थे, सरकार गिरा नहीं पाए, ये आपको दर्द है, टीस है, आपके दिल में आग लगी हुई है, आप अपने प्रभाव को उपयोग लेकर झूठे केस दर्ज करवा रहे हो, आपको मालूम है, सबके सामने है, उसका मुकाबला करेंगे हम लोग, सच्चाई हमारे साथ में है, अंतिम विजय सच्चाई की होगी।

LEAVE A REPLY