– एसीबी राजस्थान ने ही पकड़ा एसीबी अफसर बनकर गिरोह चलाने वाले जयपुर के साहिल राजपाल को, नौ देशों में फैला है गिरोह का नेटवर्क
जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो राजस्थान ने एक ऐसे अंतराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो एसीबी अफसर बनकर एसीबी को बदनाम कर रहा था और इंटरनेट कॉलिंग के माध्यम से सरकारी विभागों के इंजीनियरों और ठेकेदारों से वसूली करता था। यहीं नहीं गिरोह पर कोई शक नहीं कर सके, इसके लिए वे जिन्हें धमकाते, वसूली और ठगी करते थे, उनके फोन पर एसीबी अफसरों के मोबाइल नम्बर या लैण्ड लाइन नम्बर आते थे, जिससे ठगी के शिकार इंजीनियर्स-ठेकेदार भी जब इन नम्बरों को सर्च करते थे तो वे एसीबी अफसरों के ही निकलते थे। पडताल में सामने आया है कि करीब एक साल से यह गिरोह एसीबी अफसरों के नाम पर ठगी करने में लगे हुए थे और इनकी गतिविधियों से एसीबी अफसर बदनाम हो रहे थे। अब एसीबी ने ही फर्जी एसीबी अफसर बनकर ठगी में लिप्त इस गिरोह का नाम केवल पर्दाफाश किया है, बल्कि जयपुर से ही गिरोह के मास्टर माइंड साहिल राजपाल को भी पकड़ा है। इसकी गिरफ्तारी और गिरोह के पर्दाफाश से उन अफसरों को राहत मिली है, जिनके नाम से गिरोह वसूली में लिप्त था और अफसर बिना वजह बदनाम हो रहे थे।
– ऐसे आया पकड़ में…
एसीबी जांच में सामने आया है कि गिरोह इंटरनेट से स्कूपिंग कॉल से ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा था। स्कूपिंग कॉल से वे जिस भी अफसर का नाम लेकर बात करते थे, उनका वास्तविक नम्बर ठघी के शिकार व्यक्ति के फोन पर आता था। जिससे वह उन नम्बरों को जांचें तो विश्वास हो जाए कि ये नम्बर एसीबी अफसर के ही हैं। इसे डर कहे या मजबूरी, इंजीनियर-ठेकेदार भी इस गिरोह के झांसे में आते रहे और अब तक बहुत से लाखों रुपए गंवा भी चुके हैं। साहिल राजपाल एसीबी में पदस्थापित आरपीएस शंकर दत्त शर्मा के नाम से पीएचईडी के कुछ इंजीनियर व ठेकेदारों को वसूली के लिए फोन कर चुका था और कुछेक ने उसे डरकर के मारे पैसे भी दिए हैं। जब इंजीनियर-ठेकेदार फोन नम्बरों को चेक करते थे तो वे एसीबी अफसर और एसीबी थाने के ही होते थे। जब शंकर दत्त शर्मा के एक परिचित इंजीनियर के पास इस तरह का फोन आया तो उसे शक हुआ। उन्होंने इसकी शिकायत एसीबी डीजी आलोक त्रिपाठी को की, ताकि सच्चाई सामने आ सके। मामले में आईजी सचिन मित्तल के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई। शंकर दत्त शर्मा की ईमानदार छवि को देखते हुए एसीबी को इसके पीछे किसी बड़े गिरोह के शामिल होने का अंदेशा लगा, जो हाईप्रोफाइल तरीके अपनाकर इस तरह से ठगी की वारदातें कर रहा था। सचिन मित्तल आईजी एसीबी के नेतृत्व में टीम बनाई गई, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल किए।

– नौ देशों में फैला है नेटवर्क
एसीबी टीम ने ठगी के शिकार पीडित लोगों से बात करके मोबाइल नम्बर, लोकेशन और तारीखें निकलवाई गई, जिससे सामने आया कि इंटरनेट कॉलिंग के माध्यम से गिरोह के सदस्य उन्हें फोन करते हैं और वे जिस अफसर का नाम लेकर फोन करते थे, उस अफसर का मोबाइल नम्बर या लैण्ड लाइन नम्बर दिखाते हुए बात करते थे, ताकि उसे विश्वास हो जाए कि फोन एसीबी अफसर का ही था। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने करीब नौ देशों में नेटवर्क फैला रखा था, जो उन देशों से इंटरनेट कॉलिंग से लोगों को फंसाते थे और धमकी करके वसूली करते थे। इंटरनेट कॉलिंग से हो रही इस ठगी के बारे में डीजीपी एसीबी आलोक त्रिपाठी ने बताया कि यह स्कूपिंग कॉल होती है, जिसे आप इंटरनेट के माध्यम से कहीं से भी किसी को भी कॉल कर सकते हैं, साथ ही जिस अफसर के नाम से फोन करना चाहते हैं, उसके वास्तविक मोबाइल नम्बर भी फोन पर आते हैं, जिससे यह विश्वास हो सके कि यह फोन अफसर ने ही किए हैं। इस गिरोह में ओर भी सदस्य शामिल हैं, जल्द ही साहिल राजपाल से पूछताछ के बाद उन्हें भी गिरफ्तार किया जाएगा। इनसे पूछताछ के बाद ही सामने आ सकेगा कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को ठगा है और कितने की ठगी की है।
– शिकायत है, इतने रुपए भेज देना, नहीं तो जेल भेज दूंगा
एसीबी अफसर बनकर इंजीनियर्स से ठगी करने वाले साहिल राजपाल से एसीबी टीम पूछताछ कर रही है। प्रारंभिक पूछताछ में कई लोगों को ठगने और वसूली के मामले सामने आए हैं। एसीबी के मुताबिक, साहिल राजपाल और उसके साथी पीएचईडी और दूसरे सरकारी विभागों के इंजीनियरों और ठेकेदारों को एसीबी अफसर बनकर धमकाते थे कि उनके अधीन ठेकों में भारी गड़बड़ी हो रही है। इस पर कार्रवाई करने के बजाय ठेकेदार को भुगतान कर रहे हो। इन गड़बडिय़ों की शिकायतें एसीबी के पास आई है। मैं ही इनकी जांच कर रहा हूं। अगर तुम्हें बचना हैं तो इतने रुपये हमें पहुंचा दो, अन्यथा ठीक नहीं होगा। तुमनें पैसे नहीं दिए तो मामला दर्ज करके अरेस्ट कर लेंगे और जेल भेज देंगे। डर के मारे और दबाव में आकर वे साहिल राजपाल व गिरोह के लोगों को पैसे दिए।

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