Mahatma Gandhi

नई दिल्ली: महात्मा गांधी की पोती तारा गांधी भट्टाचार्य ने मोहनदास करमचंद गांधी के राष्ट्रपिता बनने तक के सफर में अपनी दादी कस्तूरबा गांधी के योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह भले ही सामान्य व्यक्तित्व की महिला रही हों लेकिन महात्मा गांधी को ‘‘महान व्यक्ति’’ बनाने में उनका बड़ा हाथ था। कस्तूरबा ने आजादी के संघर्ष में हमेशा गांधी का साथ दिया। उन्हें प्यार से ‘बा’ भी कहा जाता है।

भावुक होते हुए तारा गांधी भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘अगर कस्तूरबा नहीं होतीं तो गांधी कभी भी गांधी नहीं बन पाते। वह कोई असाधारण कस्तूरबा नहीं थीं बल्कि एक साधारण कस्तूरबा थीं जिन्होंने उन्हें महान बनाया। उनकी छोटी उम्र में ही शादी हो गई थी और वे साथ में बड़े हुए।’’ भट्टाचार्य एक पखवाड़े तक चलने वाली प्रदर्शनी के शुभारंभ के मौके पर शुक्रवार को यहां बीकानेर हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रही थीं। इसमें प्रमोद कपूर की किताब ‘गांधी: एन इलस्ट्रेटेड बायोग्राफी’ से ली गई दुर्लभ तस्वीरों की प्रदर्शनी लगाई गई है। गांधी ने अपनी जिंदगी और आजादी के संघर्ष में कस्तूरबा की भूमिका को खुद स्वीकार किया था।

उन्होंने दिसंबर 1938 में अपनी पत्रिका ‘हरिजन’ में एक लेख में लिखा था, ‘‘मैंने जब अपनी पत्नी को अपनी इच्छा के आगे झुकाने की कोशिश की तो उनसे अहिंसा का पाठ सीखा।’’ अपने दादा-दादी के साथ बिताए बचपन को याद करते हुए 83 वर्षीय भट्टाचार्य का गला रुंध गया। गांधी के दिवंगत बेटे देवदास गांधी की बेटी ने अपने दादा को ‘‘पारिवारिक व्यक्ति’’ और कपड़ों को लेकर ट्रेंड तय करने वाला व्यक्ति बताया।

उन्होंने कहा, ‘‘वह एक पारिवारिक व्यक्ति थे और परिवार के सदस्यों को पत्र लिखते थे तथा उनके जवाब देते थे। एक पत्र के जवाब में उन्होंने लिखा था, प्रिय तारा, यह बहुत खराब तरीके से लिखा गया पत्र है और तुम्हें अपनी लिखावट भी सुधारनी चाहिए।’’ भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘मैं दुखी हो गई थी और मैंने उसे कहीं फेंक दिया ताकि कोई भी उसे पढ़ ना सकें।’’ उन्होंने गांधी के वस्त्रों की सादगी के बारे में कहा, ‘‘उन्हें रंगों का शौक था। मैंने उनके कपड़ों में कई रंग देखे।’’

 

 

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