Jaipur Art Choupal launches at Digi Palace in Jaipur
जयपुर। जयपुर के होटल डिग्गी पैलेस में भारत के प्रमुख आर्ट फेस्टिवल – जयपुर कला  चौपाल (जेकेसी) द्वारा हाल ही में आर्टिस्ट रेजीडेंसी की शुरुआत की गई। 28 विदेशी कलाकारों एवं 14 भारतीय कलाकारों की भागीदारी के साथ 20 अक्टूबर को इस रेजीडेंसी की शुरूआत हुई। इसकी मुख्य आयोजक, लीनिका जैकब ने फेस्टिवल की जानकारी दी और कलाकारों को मटीरीअल सौंपकर रेजीडेंसी की शुरूआत की। इस आर्ट फेस्टिवल की थीम ‘आॅर बाॅडी एंड हैंड्स इन वाटर‘ है। 
 
इस अवसर पर इसकी मुख्य आयोजक, लीनिका जैकब ने कहा कि ‘‘कलाकारों तथा विभिन्न देषों एवं संस्कृतियों की कलाओं के मध्य काॅन्फ्लुअंस, काॅलोब्रेषन और कन्वर्षेसन इस फेस्टिवल का मुख्य आधार है। डिग्गी पैलेस के इस रेजीडेंसी हेतु उचित पृष्ठभूमि होने से यह स्थान पारम्परिक भारतीय कलाओं एवं कलाकारों को इस समसामयिक दुनिया में निरंतरता प्राप्त करने के लिए मंच प्रदान करता है। इससे फ्रांस, ईरान, लिथुआनिया, मैक्सिको, अमेरिका और नेपाल जैसे देशों के अनेक प्रसिद्ध कलाकारों एवं उभरते हुए कलाकारों को भारतीय कलाकारों के साथ वार्ता करने, कला के नए रूप बनाने एवं परस्पर सहयोग करने का अवसर प्राप्त होगा।‘‘10 दिवसीय इस रेजीडेंसी में कलाकारों द्वारा उनकी कृतियों पर प्रतिदिन की जाने वाली वार्ताएं एवं अनुभव साझा किया जाना भी शामिल है। इसमें कलाकारों द्वारा जल प्रबंधन प्रणाली को समझने और प्रेरणा प्राप्त करने के लिए शहर के विभिन्न स्थलों का दौरा भी किया जा रहा है। अपनी कृतियों हेतु प्रेरणा पाने के लिए आगामी दिनों में कलाकारों द्वारा विभिन्न किलों, महलों, बावड़ियों, टांकों का दौरा किया जाएगा। यही नहीं, भारतीय पारम्परिक कला के विभिन्न स्वरूपों की बारीकियों को समझने के लिए कलाकार नीरजा पाॅटरी, कागजी, पेपर फैक्ट्री, प्रसिद्ध सांगानेरी ब्लॉक पिं्रटर तथा कारपेट फैक्ट्री का दौरा भी करेंगे। 
इन 10 दिनों के दौरान कलाकारों द्वारा बनाई गई कृतियों की जवाहर कला केंद्र में 1 नवम्बर से 4 नवम्बर तक प्रदर्षनी लगाई जाएगी। इस प्रदर्षनी के साथ इस रेजीडेंसी का समापन होगा। 
 
जयपुर कला चैपाल के बारे में:
जयपुर कला चैपाल को जयपुर में प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने वाले एक प्रमुख आर्ट फेस्टिवल के रूप में डिजाइन किया गया है। यह ऐसा अनूठा मंच है जिसकी शुरूआत अंतरराष्ट्रीय स्तर की कलाओं के समकालीन स्वरूपों के साथ भारत की पारम्परिक कलाओं को एकीकृत करने के लिए की गई है। भारत की पारम्परिक कलाओं एवं कलाकारों को मंच प्रदान करना और उन्हें समसामयिक दुनिया में निरंतरता प्रदान करना इस फेस्टिवल का मुख्य उद्देश्य है। इसे विभिन्न देषों के स्थापित कलाकारों तथा नवोदित कलाकारों को भारत में कला के अंतरात्मा को जानने के साथ-साथ नवीन एवं मूल सहयोगी कलात्मक अभिव्यक्तियों के लिए उत्प्रेरक बनने का अनूठा अवसर प्रदान करने के लिए भी डिजाइन किया गया है।

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