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जयपुर। राजस्थान में लोकसभा की दो और विधानसभा की एक सीट पर उप चुनाव गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश के साथ दिसम्बर में ही होने की संभावना को देखते हुए कांग्रेस ने फिलहाल अपनी संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया पर ब्रेक लगा दिया है। कांग्रेस नेतृत्व ने संगठनात्मक चुनाव में गुटबाजी बढ़ने की आशंका को देखते हुए फिलहाल संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया पर ब्रेक लगाकर उप चुनाव की तैयारी में जुटने का मानस बनाया है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री सांवरलाल जाट के निधन के कारण रिक्त हुई अजमेर संसदीय सीट एवं सांसद महंत चांदनाथ के निधन के कारण खाली हुई है। वहीं, मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर विधायक कीर्ति कुमारी के निधन के कारण रिक्त हुई है। यह माना जा रहा है कि छह माह में चुनाव की बाध्यता को देखते हुए चुनाव आयोग गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश के साथ ही इन तीनों सीटों पर उप चुनाव करवा सकता है। अजमेर संसदीय क्षेत्र से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष् सचिन पायलट सांसद रह चुके है। लेकिन वे उप चुनाव लड़ने में अधिक दिलचस्पी नहीं दिखा रहे।

पायलट खेमे का मानना है कि 15 माह बाद होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवारी फिलहाल उनकी सबसे मजबूत मानी जा रही है, यदि लोकसभा चुनाव लड़ लिया तो इस पर असर हो सकता है। पायलट खेमे का मानना है कि चुनाव जीतने या हारने दोनों की स्थति में सीएम पद की दावेदारी पर असर पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस इस सीट से रमा पायलट और भूपेन्द्र सिंह राठौड़ के नामों पर विचार कर रही है। इधर, अलवर संसदीय सीट के लिए कांग्रेस में पूर्व केन्द्रीय मंत्री भंवर जितेन्द्र सिंह का नाम तय माना जा रहा है। जितेन्द्र सिंह अलवर के सर्वमान्य नेता है। मांडलगढ़ विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रदीप कुमार और विवेक धाकड़ के नाम पर विचार कर रही है।  सूत्रों के अनुसार, अगले कुछ दिनों में कांग्रेस नेतृत्व की ओर से इन तीनों उप चुनाव के लिए चुनाव संचालन समिति का गठन करने के साथ ही अधिकारिक रूप से चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी जाएगी। नेतृत्व ने इन तीनों क्षेत्रों में तो संगठनात्मक चुनाव प्रकिया ठंडे बस्ते में डाल ही दी। साथ ही, राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी फिलहाल थोड़ा ब्रेक लगा दिया।

 

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