accident

जयपुर। एक अनाथाश्रम में पल रही बीकानेर की लक्ष्मी को अब एक इटेलियन माता-पिता मिल गए है। लक्ष्मी की मां का 2008 में एक सड़क दुर्घटना में देहांत हो गया था और तब से लक्ष्मी यहां एक अनाथाश्रम में पल रही थी। बीकानेर के पारिवारिक न्यायालय ने लक्ष्मी को इटली के माता-पिता को गोद देने की स्वीकृति दे दी है। अपने फैसले में पारिवारिक न्यायालय के जज श्याम सुंदर लाटा ने जिला प्रशासन से कहा है कि बच्ची का जन्म प्रमाण पांच दिन में बनाया जाए और दस दिन में उसका पासपोर्ट तैयार कराया जाए।

इटली के रहने वाले जेरा अल्बर्टो और उनकी पत्नी तार्तागलिया लूसिया ने केन्द्र सरकार के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए एक भारतीय बच्ची को गोद लेने का आवेदन किया था। सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (सीएआरए) केन्द्र सराकर की संस्था है जो बच्चों के गोद जाने की प्रक्रिया की मॉनिटरिंग करती है और यह सुनिश्चित करती है कि बच्चे सही परिवार में जाए। इटली के इस दम्पति ने अपने आवेदन में कहा है कि वे 2011 में पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर से एक लड़के को गोद ले चुके हैं और अब अपना परिवार पूरा करने के लिए लड़की को गोद लेना चाहते है। दंपती ने लिखा है कि उन्हें भारत और यहां की संस्कृति पसंद है, इसलिए वे भारतीय बच्चे चाहते है। दम्पति ने केन्द्रीय महिला व बाल विकास मंत्री मेनका गांधी को भी सहायता करने के लिए पत्र लिखा था। मेनका गांधी ने राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को प्रक्रिया तेजी से पूरी करने के लिए पत्र लिखा है। पारिवारिक न्याायलय ने इस बारे में दिए अपने आदेश में कहा है कि विदेशी दंपती सराहना के हकदार है, क्येांकि दूसरे देश के बच्चों को गोद लेने के लिए बहुत बड़ा दिल चाहिए।

कोई जवाब दें