नई दिल्ली। धार्मिक कट्टरता और विचारधारा के चलते केरल में वैसे ही अमन-चैन बिगड़ा हुआ है, वहीं अब इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने भी केरल में अपनी जड़े जमाना शुरु कर दिया है। आईएस में भर्ती होने के लिए कई युवक केरल से भाग अरब देश पहुंच चुके हैं। इन्होंने परिजनों को भी आईएस में भर्ती होने की सूचना दे रखी है। आईएस में भर्ती होने जाने वालों में बेरोजगार युवक ही नहीं डॉक्टर, इंजीनियर भी है। एक ही परिवार के चार चिकित्सक (दो युवक व उनकी पत्नियां) भी आईएस में शामिल होने के लिए केरल को छोड़ चुके हैं। एक के बाद एक कई युवकों के आईएस में शामिल होने की सूचनाओं से केरल सरकार और खुफिया एजेंसियां भी ना केवल सकते में है, बल्कि अब इन्होंने पैनी नजर रखते हुए आईएस का जाल फैला रहे लोगों पर नजर रखनी भी शुरु कर दी है। कई लोगों को पकड़ा भी है, लेकिन मुख्य सरगना जो आईएस के लिए भर्तियां कर रहे थे, वे फरार हो चुके हैं और देश छोड़कर ईराक पहुंच चुके हैं। उन लोगों के सम्पर्क में रहने वाले लोगों खासकर युवाओं को खुफिया पुलिस पकड़कर ना केवल इस गिरोह की जानकारी जुटा रही है, वहीं उनकी काउंसलिंग करके आईएस व दूसरे आतंकी संगठनों से दूर रहने की सीख भी दे रही है। देश में सर्वाधिक तौर पर आईएस में भर्ती के लिए केरल से ही लोग अरब देशों में जा रहे हैं। इसके बाद महाराष्ट, आन्ध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश का नम्बर आता है, जहां से भी कई लोग ईराक व सीरिया जाकर आईएस के लडाके बन रहे हैं। आईएस भर्ती की इन सूचनाओं से देश व राज्यों की खुफिया एजेंसियों सतर्क हो गई है, वहीं यह खतरा भी मंडराने लगा है कि कहीं ये वापस आकर देश में कहीं आतंकी गतिविधियों में नहीं लग जाए।

– अब्दुल्ला और मनसीद कर रहा है भर्तियां

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक केरल में आईएस के लिए भारत से लड़ाकों की भर्तियां कर रहा है। खुफि या एजेंसियां लगातार अब्दुल्ला की तलाश कर रही हैं। केरल के 67 भारतीयों पर आईएस के लिए काम करने का अंदेशा है। अन्य कई लोग भी इस आतंकी संगठन से जुड़े हो सकते हैं। अब्दुल्ला के पिता कोझिकोड में ट्रक ड्राइवर हैं। वह दुबई में नौकरी पर गया तो आतंकी संगठन आईएस में शामिल हो गया। भारत, अफ गानिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात की खुफि या एजेंसियां अब्दुल्ला की तलाश कर रही हैं। अब्दुल्ला लोगों को बरगला कर आईएस से जोडऩे का काम कर रहा है। वह अब अफ गानिस्तान के नंगरहार प्रांत में रहता है और आईएस में अहम पद पर कार्यरत है। एक खुफि या अधिकारी ने कहा, नंगरहार ब्लैक होल की तरह है। अगर आप गायब होना चाहते हैं तो ये बिल्कुल सटीक जगह है। अफ गान खुफि या सर्विस भी इस इलाके में खुद को असहाय पाती है। सुरक्षा एजेंसियों को यकीन है कि अब्दुल्ला ने 21 केरलवासियों को नंगरहार बुलाया है, जिनमें आठ नाबालिग भी शामिल हैं। इस गुट का नेतृत्व कट्टरपंथी मौलाना अब्दुल राशिद ने किया था। आईएस के लिए भर्ती करने वाले सेल की सबसे अहम कड़ी दोहा में रहने वाला मनसीद बिन मोहम्मद है। जो पांच साल पहले केरल के पनूर से पश्चिम एशिया चला गया। मोहम्मद ने हिंदुत्ववादी संगठनों की गतिविधियों पर शोध किया था। एनआईए के अधिकारियों के अनुसार दोहा जाने के बाद वो आईएस से जुड़ गया और अबु बकर अल बगदादी उसका नया नेता बन गया।
खुफि या एजेंसियों के अनुसार मोसूल और रक्का में आईएस का आधार कमजोर होता जा रहा है। इसलिए आईएस ने भारतीय जिहादियों को सैन्य प्रशिक्षण देने के लिए अफ गानिस्तान भेजने का निर्देश दिया है। इन्हें भारत में हमले करने के लिए भी उकसाया जा रहा है और खुद से तैयार किए
विस्फ ोटकों के प्रयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।

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