jd: maisars emaaraar ko karodon ka phaayada dene ke lie badhaaya ret kontrekt

भवानी सिंह
जयपुर। राजधानी जयपुर में ठेका फर्मों और इंजीनियर्स का गठजोड़ देखना है तो जयपुर विकास प्राधिकरण से बड़ा उदाहरण कोई हो ही नहीं सकता। जेडीए इलेक्ट्रिक विंग के अधिकारी और इंजीनियर्स इन दिनों एक फर्म पर इस कदर मेहरबान हो रहे हैं कि नियम और कायदों की धज्जियां उड़ाने में भी उन्हें कोई संकोच नहीं हो रहा है। जेडीए इलेक्ट्रिक विंग के अधिकारियों की ओर से मैसर्स एमआरआर इलेक्ट्रिकल्स एण्ड कॉन्टेज्क्टर्स को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर करने करने की बजाए न केवल गलत तरीके से रेट कॉन्ट्रेक्ट बढ़ा दिया बल्कि फर्म को आचार संहिता में करोड़ों रूपए के वर्क आॅर्डर भी जारी कर दिए। दरअसल जेडीए में बिजली की लाइनों को भूमिगत करने और स्ट्रीट लाइटें लगाने के लिए मैसर्स एमआरआर इलेक्ट्रिकल्स को एक साल का रेट कॉन्ट्रेक्ट जारी किया गया था, जो 7 सितम्बर, 2018 को पूरा हो गया था। जेडीए इलेक्ट्रिक विंग ने अपनी चहेती फर्म को करोड़ों रूपए का काम देने के लिए 8 सितम्बर, 2018 को मैसर्स एमआरआर इलेक्ट्रिकल्स का रेट कॉन्ट्रेक्ट बढ़ा दिया। जेडीए इलेक्ट्रिक विंग के अधिकारी और इंजीनियर्स की ओर से यह सारा खेल मैसर्स एमआरआर इलेक्ट्रिकल्स को करोड़ों का फायदा पहुंचाने के लिए किया गया। जेडीए इलेक्ट्रिक विंग की ओर से जानबूझकर रेट कॉन्ट्रेक्ट पूरा होने से पहले नए टेंडर नहीं किए, ताकि मैसर्स एमआरआर इलेक्ट्रिकल्स का रेट कॉन्ट्रेक्ट आसानी से बढाया जा सके। इतना ही नहीं रेट कॉन्ट्रेक्ट बढ़ाने के बाद फर्म को न्यू सांगानेर रोड़ से पत्रकार कॉलोनी, 100 फीट सेक्टर रोड मांग्यावास महारानी गार्डन और न्यू सांगानेर रोड से मुहाना मंडी रोड वाया सरस्वती कॉलोनी रोड की बिजली लाइनों को भूमिगत और शिफ्ट करने के साथ ही स्ट्रीट लाइटें लगाने का करीब 8 करोड़ रूपए के कामों के कार्यादेश आचार संहिता के दिन जारी कर दिए। जेडीए इलेक्ट्रिक विंग के अधिकारी और इंजीनियर्स मैसर्स एमआरआर इलेक्ट्रिकल्स पर इस कदर मेहरबान हैं कि फर्म को वर्क आॅर्डर जारी करने के लिए आचार संहिता के दिन ही इन कार्यों की तकनीकी स्वीकृति जारी कर दी और उसी दिन फर्म को करोड़ों रूपए के वर्क आॅर्डर भी जारी कर दिए।

फर्म के फर्जीवाड़े पर कार्रवाई की बजाए करोड़ों की मेहरबानी
जेडीए इलेक्ट्रिक विंग के अधिकारी और इंजीनियर्स एक ओर जहां मैसर्स एमआरआर इलेक्ट्रिकल्स पर मेहरबान हो रहे हैं। जबकि मैसर्स एमआरआर इलेक्ट्रिकल्स के फर्जी कार्यों के चलते पूर्व में जेडीए में ही कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी, लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत के चलते मामले में आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। फर्म पर कार्रवाई का मामला आज भी फाइलों में ही दबा हुआ है। जेडीए अधिकारियों द्वारा फर्म पर कार्रवाई करने की बजाए उस पर करोड़ों रूपए की मेहरबानी की जा रही है। फर्म को गलत तरीके से करोड़ों रूपए के कार्य दिए जा रहे हैं, जो कि जेडीए इलेक्ट्रिक विंग के अधिकारियों और इंजीनियर्स की मिलीभगत को साबित कर रहा है।

आचार संहिता के दिन करोड़ों के वर्क आॅर्डर
जेडीए की ओर से अपनी चहेती फर्म मैसर्स एमआरआर इलेक्ट्रिकल्स को फायदा पहुंचाने के लिए रेट कॉन्ट्रेक्ट का समय पूरा होने के बाद उसे बढ़ा दिया और नए कायार्देश देने से पहले ही आचार संहिता लग गई। जेडीए इलेक्ट्रिक विंग के अधिकारी और इंजीनियर्स द्वारा आचार संहिता के दिन मैसर्स एमआरआर इलेक्ट्रिकल्स को करोड़ों रूपए के आधा दर्जन से ज्यादा वर्क आॅर्डर जारी कर दिए।

एक दिन में ही तकनीकी स्वीकृति से लेकर कायार्देश तक कर दिए जारी
जेडीए अधिकारियों और इंजीनियर्स की मैसर्स एमआरआर इलेक्ट्रिकल्स पर मेहरबानी का इससे बड़ा उदाहरण और क्या होगा। फर्म का रेट कॉन्ट्रेक्ट बढ़ाने के बाद फर्म को काम देने के लिए जेडीए अधिकारियों की ओर से आचार संहिता के दिन 6 अक्टूबर, 2018 को तकनीकी स्वीकृति जारी की गई और उसी दिन फर्म को करोड़ों रूपए के वर्क आॅर्डर जारी कर दिए। आम जनता का जेडीए में अपने कार्यों के लिए महिनों तक चक्कर काटने के बाद भी काम नहीं होता, लेकिन ठेका कंपनियों के महिनों में पूरे होने वाले काम जेडीए इंजीनियर्स द्वारा एक ही दिन में पूरे कर कायार्देश भी जारी कर दिए।

शिफ्टिंग का सामान स्टोर में जमा की बजाए हो रहा है पार
जेडीए की ओर से मैसर्स एमआरआर इलेक्ट्रिकल्स को न्यू सांगानेर से पत्रकार कॉलोनी, 100 फीट रोड महारानी गार्डन से मांग्यावास और न्यू सांगानेर रोड से मुहाना रोड वाया सरस्वती कॉलोनी रोड पर बिजली की लाइनों को शिफ्ट और भूमिगत करने के साथ ही स्ट्रीट लाइटों लगाने का 8 करोड़ से ज्यादा का कार्य किया जा रहा है। शर्तों के अनुसार सेक्टर रोड की चैड़ाई के दौरान पुराने सामान, केबल, स्ट्रीट पोल और लाइटों को स्टोर में जमा कराना है, लेकिन साइट से सामान पार हो रहा है साथ ही इसी फर्म एमआरआर पर इसी सामान को दूसरी साईटों पर लगाने के आरोप भी लग रहे हैं।

यूडीएच के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहा है जेडीए
जेडीए की ओर से चहेती फर्मों को फायदा पहुंचाने के लिए यूडीएच के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। यूडीएच विभाग की ओर से 23 फरवरी, 2018 को एक आदेश जारी किया गया था, जिसके अनुसार जेडीए क्षेत्र में बिजली की नई लाईनें डालने, लाईनों की शिफ्टिंग करने, ट्रांसफार्मर लगाने, 33 और 11 केवी ब्रेकर्स आदि का कार्य डिपोजिट वर्क में डिस्कॉम कराया जाएगा। लेकिन जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जयपुर डिस्कॉम से डिपोजिट वर्क में कार्य कराने की बजाए चहेती फर्मों को फायदा पहुंचाने के लिए अपने स्तर पर ही मिलीभगत कर करोड़ों के कार्य करवाए जा रहे हैं। इस सारे खेल में ठेका फर्मों के साथ जेडीए अधिकारी जमकर चांदी कूट रहे हैं।

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