बेंगलुरु। संसार में सबसे घनिष्ठ और खास रिश्तों की बात चलती है तो सबसे पहले मां-बेटे के रिश्ते का नाम जुबान पर आता है। इसे प्रत्यक्ष तौर पर घर-परिवार और समाज में देखा भी जा सकता है। ऐसा ही कुछ रिश्ता जानवरों में भी देखा जा सकता है। वे भी मानवीय गुणों की तरह व्यवहार करते हैं। अगर कुछ उनके साथ कुछ घटना होती है, वे भी समझते हैं और याद रखते हैं। कुछ घटनाएं तो ऐसी होती है, जो जिन्दगी पर्यंत भूल नहीं पाते हैं, चाहे वे इंसान हो या जानवर। ऐसा ही कुछ देखने को मिल रहा कर्नाटक के सिरसी जिले में। यहां एक गाय ऐसी है, जो एक खास बस को देखकर ही उसके सामने आकर उसे रोक लेती है और उसे आगे बढऩे नहीं देती है। यह तमाशा रोज होता है। लोग भी इसे देखकर समझ नहीं पाते थे ऐसा क्यों करती है गाय। लेकिन बाद में जब लोगों को पता चला तो हर किसी के मन में उसके गाय के प्रति श्रद्धा का भाव बढ़ गया और रोडवेज चालक के प्रति घृणा। गाय जिस बस को रोकती है, उस बस ने करीब चार साल पहले उस गाय के बछड़े को टक्कर मारकर कुचल दिया था। उस दर्दनाक सदमे को गाय आज तक भूल नहीं पाई है और ना ही उस बस को, जिसमें गाय का बछड़ा कुचला गया था। गाय उस दुर्घटना स्थल के आस-पास ही मंडराती रहती है, जब भी गाय उस बस को देखती है तो उसके पीछे दौडऩे लगती है और उसके आगे खड़ी होकर आगे नहीं बढऩे देती है। ऐसा नहीं कि वहां मौजूद लोग और यात्री उस गाय को सड़क से हटाने का प्रयास नहीं करते हैं, लेकिन जैसे ही हटाते ही थोडे समय बाद फिर से बस के आगे धमक जाती है गाय। जब तक बस चालक गाड़ी को भगाकर नहीं ले जाता है तब तक गाय पीछे लगी रहती है। एक बार पीछे रहने के बाद थककर गाय हारकर बैठ जाती है। फिर वहीं पहुंच जाती है, जहां उसका बछड़ा मरा था। यह रोज का नियम है गाय का। जनता की भी गाय के प्रति सहानुभूति है, लेकिन विधाता के आगे किसी की नहीं चलती। ऐसा ही कुछ इस गाय के साथ हुआ। बछड़ा खोने का यह वाकया गाय के मन-मस्तिष्क में ऐसा छप गया है कि वह उसे भूल नहीं पा रही है।

LEAVE A REPLY